आदिवासी समुदाय के लिए घड़ियाली आंसू बहाना बंद करें बाबूलाल : सोनाल

 


रांची, 02 जनवरी (हि.स.)। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सोनाल शांति ने कहा है कि आदिवासी समाज के आस्था परंपरा और पहचान को सनातन के साथ जोड़कर बाबूलाल मरांडी आदिवासी समाज के दशकों से चली आ रही है सरना धर्मकोड की मांग को ठुकरा रहे हैं।

उन्होंने शुक्रवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि आदिवासी समाज की सामाजिक संरचना और जीवन पद्धति की जड़ें इतनी गहरी और मजबूत हैं कि उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता। संपूर्ण आदिवासी समाज अच्छी तरह समझ रहा है कि झारखंड मे उनकी आस्था और अस्तित्व का संरक्षण महागठबंधन सरकार ही कर सकती है। इसका संदेश भाजपा को लोकसभा और विधानसभा चुनाव में मिल चुका है।

उन्होंने कहा कि अपने शासनकाल में भाजपा ने आदिवासी समुदाय को छलने और भड़काने का काम किया था। बाबूलाल मरांडी को जब-जब आदिवासी समुदाय सामने देखता है तो झारखंड बनने के तीन माह बाद ही बाबूलाल के शासनकाल में हुए तपकरा गोलीकांड की गुंज और निहत्थे आदिवासी आंदोलनकारियों के मृत चेहरे सामने आते हैं। रघुवर दास के शासनकाल में पत्थलगढ़ी आंदोलन के मामले में 10 हजार आदिवासी समुदाय के लोगों पर मुकदमे दर्ज किए गए थे। इसलिए आदिवासी समुदाय के लिए घड़ियाली आंसू बहाना बाबूलाल मरांडी को बंद करना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak