जंगल में सरकारी दवाइयां फेंकने का वीडियो साझा कर बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर साधा निशाना
रांची, 04 जून (हि.स.)। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने लातेहार जिले में जंगल में सरकारी दवाइयां फेंके जाने का वीडियो और तस्वीरें साझा कर राज्य सरकार पर निशाना साधा है।
मरांडी ने गुरुवार सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि इस घटना ने झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ये केवल दवाइयां नहीं थीं, बल्कि गरीब मरीजों के इलाज का अधिकार, जनता के टैक्स का पैसा और सरकारी जवाबदेही सड़क पर बिखरी हुई हैं। अफसोस की बात यह है कि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी को जनता की इस पीड़ा से ज्यादा सोशल मीडिया पर रील बनाने, कैमरे के सामने बयान देने और आलोचकों को मुकदमे व केस की धमकी देकर डराने में दिलचस्पी दिखाई देती है।
मरांडी ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो को डालते हुए लिखा कि आज झारखंड का गरीब मरीज सरकारी अस्पतालों में दवा के लिए भटक रहा है। कहीं डॉक्टर नहीं, कहीं बेड नहीं, कहीं जांच की सुविधा नहीं और जहां कुछ उपलब्ध है वहां दवाइयों का टोटा। लेकिन दूसरी तरफ लाखों रुपये की सरकारी दवाइयां सड़क किनारे फेंक दी जाती हैं। आखिर यह कैसी स्वास्थ्य व्यवस्था है? जब जनता सवाल पूछती है, पत्रकार मुद्दा उठाते हैं, विपक्ष आवाज उठाता है या सोशल मीडिया पर लोग सरकार की विफलता बताते हैं, तब जवाब देने के बजाय केस-मुकदमे की धमकी देकर लोगों को चुप कराने की नाकाम कोशिश शुरू हो जाती है। क्या लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध है? क्या जनता अपने टैक्स के पैसे का हिसाब भी नहीं मांग सकती?
उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर तंज कसते हुए आगे कहा कि रील और कैमरों से अस्पताल नहीं चलते। डायलॉगबाजी से मरीजों का इलाज नहीं होता। धमकी देकर सच्चाई नहीं छिपाई जा सकती। जब मरीज दवा के बिना परेशान थे, तब ये दवाइयां सड़क पर कैसे पहुंचीं। किसके संरक्षण में यह लापरवाही हुई। अब तक कितने अधिकारियों पर कार्रवाई हुई। या फिर हमेशा की तरह मामले को दबाने और सवाल पूछने वालों को डराने का खेल चलेगा।
उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया है कि आखिर कब तक गरीबों की जिंदगी, जनता के टैक्स के पैसे और स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ ऐसा मजाक होता रहेगा।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे