जेपीएससी-जेएसएससी मामला : बंद लिफाफे में सीआईडी रिपोर्ट पर बाबूलाल ने उठाए सवाल, सीबीआई जांच की मांग
रांची, 16 सितंबर (हि.स.)। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) से जुड़े मामलों में राज्य सरकार की ओर से अपराध जांच विभाग (सीआईडी) की जांच रिपोर्ट उच्च न्यायालय में बंद लिफाफे में पेश किए जाने पर सवाल उठाया है। उन्होंने पूछा कि रिपोर्ट चार सप्ताह बाद बंद लिफाफे में क्यों पेश की जा रही है और सरकार जांच से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने से क्यों बच रही है।
मरांडी ने बुधवार को सोशल मीडिया एक्स के माध्यम से कहा कि यह राहत की बात है कि अदालत ने रिपोर्ट दाखिल करने के लिए सरकार को सिर्फ 48 घंटे का समय दिया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार पारदर्शिता से डर रही है और 22 परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले के पीछे ऐसी कौन-सी जानकारी है, जिसे वह सार्वजनिक नहीं करना चाहती।
बाबूलाल ने कहा कि मामला केवल परीक्षाएं रद्द करने तक सीमित नहीं है। असली सवाल यह है कि परीक्षाओं में गड़बड़ी कैसे हुई, इसके लिए जिम्मेदार कौन है और उन लाखों अभ्यर्थियों का क्या होगा, जिन्होंने इन परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों लगाए हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा का भी उल्लेख करते हुए कहा कि पिछली बार सीआईडी की जांच को लेकर भी कई सवाल उठे थे। उनके मुताबिक, जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा से पहले नेपाल, बिहार और बंगाल में 135 प्रश्नों के लीक होने की जानकारी सामने आई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सीआईडी ने मामले को महज ठगी का मामला बताया और उच्च न्यायालय को गुमराह किया।
मरांडी ने कहा कि झारखंड के लाखों युवाओं के मन में अब यह सवाल है कि जेपीएससी और जेएसएससी की 22 परीक्षाओं के मामले में कहीं वही स्थिति तो नहीं दोहराई जा रही है। उन्होंने कहा कि अदालत को जवाब बंद लिफाफे में दिया जा सकता है, लेकिन लाखों युवाओं के सवालों को बंद लिफाफे में नहीं रखा जा सकता।
उन्होंने युवाओं को न्याय दिलाने के लिए पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे