खनिज राजस्व घटा तो केंद्र नहीं, राज्य की नीतियां भी जिम्मेदार : बाबूलाल

 


-एमएमडीआर संशोधन विधेयक को लेकर सियासत तेज, बाबूलाल मरांडी ने वित्त मंत्री के पत्र पर उठाए सवाल

रांची, 28 अगस्त (हि.स.)। एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026 को लेकर झारखंड में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के पत्र का जवाब देते हुए राज्य के आर्थिक नुकसान के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराने पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि केंद्र से राज्य का हक मांगना गलत नहीं है, लेकिन खनिज राजस्व में कमी के लिए राज्य सरकार की नीतियों और फैसलों की भी समीक्षा होनी चाहिए।

शुक्रवार को पत्र के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मरांडी ने कहा कि एमएमडीआर संशोधन पूरे देश में समान रूप से लागू है। ऐसे में केवल झारखंड सरकार को इससे परेशानी क्यों हो रही है, यह सवाल सरकार की मंशा पर खड़ा होता है। उन्होंने कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर केंद्र से सवाल करने के साथ राज्य सरकार को अपने स्तर पर भी जवाबदेही तय करनी चाहिए।

बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि राज्य सरकार ने खनिजों पर भारी उपकर लगाया है। उनके अनुसार, पिछले वर्ष उपकर से करीब 7,500 करोड़ रुपये की आय हुई, जबकि खनन रॉयल्टी का बजट अनुमान 22,000 करोड़ रुपये से घटकर करीब 16,000 करोड़ रुपये रह गया। उन्होंने इसे लगभग 6,000 करोड़ रुपये की कमी बताते हुए राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाया।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कोयले पर 450 रुपये प्रति टन और लौह अयस्क पर 600 रुपये प्रति टन तक उपकर लगाए जाने से झारखंड के खनिज महंगे हो गए हैं। इसका असर खदानों और क्रशर उद्योग पर पड़ा है।

मरांडी ने दावा किया कि सिंहभूम क्षेत्र में कई खदानें और आयरन क्रशर बंद हैं, जिससे खनन गतिविधियों के साथ-साथ स्थानीय मजदूरों की आजीविका भी प्रभावित हुई है।

नेता प्रतिपक्ष ने ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां खनिज ब्लॉकों की नीलामी और उत्पादन बढ़ाने पर अधिक जोर दिया गया। उन्होंने झारखंड सरकार से सवाल किया कि राज्य में बंद पड़ी लौह अयस्क खदानों को अब तक चालू क्यों नहीं किया गया।

बाबूलाल यह भी पूछा कि केंद्र सरकार से मिले कोल ब्लॉक को अब तक शुरू करने की दिशा में प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए।

मरांडी ने आरोप लगाया कि वैध खनिज महंगा होने की स्थिति में अवैध खनन को बढ़ावा मिल सकता है। उनके अनुसार, अवैध खनन से सरकार को राजस्व नहीं मिलता, जबकि अवैध कारोबार करने वालों को लाभ होता है।

बाबूलाल मरांडी ने बालू घाट और पत्थर खदानों की नीलामी को लेकर भी वित्त मंत्री से सवाल किया। उन्होंने पूछा कि पिछले वर्षों में इनकी नीलामी क्यों नहीं हुई और जिन खदानों की नीलामी की गई, उनमें से कई अब तक चालू क्यों नहीं हो पाई हैं।

भाजपा नेता ने कहा कि खनिज संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल नहीं होने से राज्य को संभावित राजस्व और रोजगार दोनों का नुकसान हो रहा है।

मरांडी ने राज्य सरकार के बजट खर्च को लेकर भी सवाल उठाया। उनके अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में राज्य के सभी विभाग मिलकर बजट की एक प्रतिशत राशि भी खर्च नहीं कर पाए।

उन्होंने उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित रहने, निकाय चुनाव नहीं होने और राज्य वित्त आयोग का गठन नहीं किए जाने को लेकर भी सवाल उठाया। उनका आरोप है कि इन कारणों से राज्य को केंद्रीय अनुदान का नुकसान हो रहा है।

नेता प्रतिपक्ष ने वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर से पूछा कि क्या वह इन सभी सवालों को मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों के समक्ष उठाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाएंगे।

उन्होंने कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति के लिए केवल केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है। केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकार की नीतियों और फैसलों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

मरांडी ने कहा, “सरकारें आती-जाती हैं, राज्य स्थायी रहता है।” उन्होंने कहा कि वह इस बात से सहमत हैं, लेकिन राज्य के साथ उसकी जवाबदेही का हिसाब भी स्थायी रहता है।

बाबूलाल मरांडी ने वित्त मंत्री से सवाल करते हुए कहा कि यदि वे केंद्र से सवाल उठा रहे हैं तो क्या वे इन्हीं सवालों को मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों के सामने भी उठाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाएंगे। उन्होंने कहा कि यह बात तभी सार्थक होगी, जब जवाबदेही सिर्फ केंद्र से सवाल पूछने तक सीमित न रहकर राज्य सरकार के फैसलों पर भी लागू हो।----------------

हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे