तप इच्छाओं पर नियंत्रण और आत्मशुद्धि का मार्ग : मुनिश्री शुभानंद
रामगढ़, 22 सितंबर (हि.स.)। दसलक्षण महापर्व के सातवें दिन मंगलवार को शहर के मेन रोड स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर और रांची रोड स्थित पार्श्वनाथ जिनालय में 'उत्तम तप धर्म' की विधिवत आराधना ने पूरे मंदिर परिसर को भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। जिनेन्द्र भगवान के अभिषेक, शांतिधारा और पूजन के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। समस्त पूजन कार्य पंडित संदीप शास्त्री के सान्निध्य में अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन की धार्मिक क्रियाएं विधि-विधानपूर्वक संपन्न कराई गईं। मुनिश्री 108 पुण्यानंद जी महाराज के मुखारविंद से शांतिधारा संपन्न हुई।
श्री दिगंबर जैन मंदिर में पाण्डुशिला पर विराजमान मुनिसुव्रतनाथ भगवान की अष्टधातु प्रतिमा पर कलश से जलाभिषेक का पुण्यलाभ राजेंद्र जैन, राजेश जैन और प्रतीक चूड़ीवाल परिवार ने प्राप्त किया, जबकि, शांतिधारा का पुण्यलाभ इंद्रमणि देवी चूड़ीवाल परिवार, समस्त चूड़ीवाल परिवार तथा कमल, निखिल, अखिल, सी, चैतन्य काला परिवार, रायपुर ने प्राप्त किया। वहीं, चंद्रप्रभ भगवान की प्राचीन प्रतिमा पर कलश से अभिषेक का पुण्यलाभ महिपाल, अशोक, सुनील एवं संजय सेठी परिवार ने प्राप्त किया। महावीर भगवान की प्राचीन प्रतिमा पर स्वर्ण अभिषेक का पुण्यलाभ जीवन मल जैन, जंबू कुमार, अभिजीत एवं अमित पाटनी परिवार ने प्राप्त किया।
1008 श्री पार्श्वनाथ जिनालय, रांची रोड में भी अभिषेक, शांतिधारा एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुए।
मौके पर मुनिश्री 108 शुभानंद महाराज ने उत्तम तप धर्म की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तप केवल उपवास या शारीरिक कष्ट सहने का नाम नहीं है। अपनी इच्छाओं, आसक्तियों और विकारों पर संयम प्राप्त करना भी तप का महत्वपूर्ण स्वरूप है। उन्होंने श्रद्धालुओं से उत्तम तप को दैनिक जीवन में आत्मसात करने और आत्मशुद्धि एवं संयम के मार्ग पर आगे बढ़ने का आह्वान किया। दसलक्षण महापर्व के सभी धार्मिक कार्यक्रम मुनिश्री 108 पुण्यानंद जी महाराज, मुनिश्री 108 शुभानंद जी महाराज एवं क्षुल्लकश्री 105 दिव्यानंद जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में संपन्न हो रहे हैं।
कार्यक्रम की जानकारी समाज के मीडिया प्रभारी श्रवण जैन ने दी।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश