प्रकृति ही मानव सभ्यता की सबसे बड़ी संरक्षक : संजीव कुमार
-ऑल इंडिया स्प्रिंग आर्ट कैंप 'प्रकृति 2026' का समापन
रांची, 22 मार्च (हि.स.)। वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय स्प्रिंग आर्ट कैंप-2026 का समापन रविवार को “प्रकृति 2026” थीम के साथ हुआ। विश्व जल दिवस के अवसर पर संपन्न हुए इस आयोजन ने पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्द्धन का सशक्त संदेश दिया।
समापन समारोह में राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (पीसीसीएफ हॉफ) संजीव कुमार ने कहा कि प्रकृति मानव सभ्यता की सबसे बड़ी संरक्षक है। उन्होंने कहा, “जब कलाकार का हृदय प्रकृति के लिए धड़कता है, तब उसके कैनवास पर केवल चित्र नहीं उभरते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए चेतना, करुणा और संरक्षण का संदेश भी आकार लेता है।”
उन्होंने कहा कि इस कला शिविर का समापन विश्व जल दिवस पर होना अत्यंत सार्थक है, क्योंकि जल जीवन का मूल आधार है और वन पर्यावरणीय संतुलन के प्रमुख स्तंभ हैं। उन्होंने कहा, “यदि जल बचेगा तो कल बचेगा, यदि वन बचेंगे तो जीवन बचेगा और यदि प्रकृति सुरक्षित रहेगी तो मानवता भी सुरक्षित रहेगी।”
तीन दिवसीय यह कला महोत्सव केवल चित्रकला तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और जनजागरूकता का एक प्रभावी अभियान बनकर सामने आया। देशभर से आए कलाकारों ने अपने कैनवास पर वनों की हरियाली, नदियों की लय, पक्षियों का सौंदर्य, वन्यजीवों की गरिमा और पर्यावरणीय चुनौतियों को जीवंत रूप में उकेरा।
समापन अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने आयोजन को और भी आकर्षक बना दिया। सरायकेला के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत छऊ नृत्य ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि भारतीय संस्कृति और प्रकृति का संबंध केवल परंपरा तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन दर्शन का अभिन्न हिस्सा है।
कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों, कलाकारों, विद्यार्थियों और कला प्रेमियों की उपस्थिति ने आयोजन को गरिमामय बना दिया। अंत में शिविर में भाग लेने वाले कलाकारों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए स्मृति-चिह्न और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया।--------------
हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे