नीट नामांकन में फर्जी प्रमाण-पत्र मिलने पर होगा एडमिशन रद्द, दर्ज होगी प्राथमिकी
रांची, 14 अगस्त (हि.स.)। झारखंड में
नीट-यूजी-पीजी के तहत मेडिकल, डेंटल और आयुष पाठ्यक्रमों में फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर नामांकन की संभावना खत्म करने के लिए राज्य सरकार ने सख्त व्यवस्था लागू कर दी है। इस संबंध में शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग ने विभागीय संकल्प जारी कर विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू कर दी है।
जारी विभागीय संकल्प में कहा गया है कि नीट के नामांकन में फर्जीवाड़े पर सख्ती बरतते हुए फर्जी प्रमाण-पत्र मिलने पर एडमिशन रद्द करने के साथ-साथ प्राथमिकी दर्ज कर ठोस कार्रवाई की जाएगी। यह एसओपी रिम्स, रांची सहित राज्य के सभी सरकारी और निजी मेडिकल, डेंटल, होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक और यूनानी महाविद्यालयों में तत्काल प्रभाव से लागू होगी। सरकार के इस निर्णय से नीट नामांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने और फर्जी प्रमाण-पत्रों के आधार पर प्रवेश लेने की कोशिशों पर प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है।
इसके तहत अभ्यर्थियों के स्थानीय निवास, जाति, आय और दिव्यांगता प्रमाण-पत्रों का ऑनलाइन के साथ भौतिक सत्यापन अनिवार्य किया गया है। संकल्प में कहा गया है कि राज्यस्तरीय जांच के अलावा रिम्स और प्रत्येक संबंधित मेडिकल कॉलेज में मूल प्रमाण-पत्रों की पुनः जांच के लिए संस्थान स्तरीय समिति होगी। इसमें निदेशक, प्राचार्य, डीन अध्यक्ष, अधीक्षक सदस्य और नामांकन प्रभारी सदस्य सचिव होंगे।
नामांकन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (जेसीईसीईबी) स्तर पर उच्चस्तरीय समितियां गठित की गई हैं। एमबीबीएस, एमडी, एमएस के लिए समिति में रिम्स के नामांकन प्रभारी, सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों के नामांकन प्रभारी, स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि और विशेष कार्य पदाधिकारी, जेसीईसीईबी सदस्य सचिव होंगे। बीडीएस, एमडीएस के लिए रिम्स और सभी सरकारी डेंटल कॉलेजों के नामांकन प्रभारी एवं विशेष कार्य पदाधिकारी सदस्य सचिव होंगे। आयुष, बीएचएमएस के लिए सभी सरकारी आयुष कॉलेजों के नामांकन प्रभारी और विशेष कार्य पदाधिकारी समिति में होंगे।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जांच में प्रमाण-पत्र फर्जी पाए जाने पर संबंधित कॉलेज के प्राचार्य तत्काल नामांकन रद्द करेंगे और अभ्यर्थी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। सभी डिजिटल एवं भौतिक अभिलेख सुरक्षित रखे जाएंगे, ताकि आवश्यकता पड़ने पर दोबारा सत्यापन हो सके। यह एसओपी रिम्स सहित राज्य के सभी सरकारी एवं निजी मेडिकल, डेंटल, होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक और यूनानी महाविद्यालयों में तत्काल प्रभाव से लागू होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar