एनसीएसटी की बैठक में हुई 21 मामलों की सुनवाई

 


रांची, 27 अप्रैल (हि.स.)। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) नई दिल्ली की ओर से सर्कुलर रोड स्थित न्यू सर्किट हाउस में सोमवार को 21 मामलों की सुनवाई की गई। आयोग की ओर से हजारीबाग निवासी मालती देवी की शिकायत का समाधान किया गया।

वहीं खेलकूद और युवा कार्य विभाग से संबंधित मामले में विभागीय सचिव को आयोग की ओर से समन जारी करने का निर्देश दिया गया। जेएसएससी से संबंधित मामले में आयोग की ओर से सुनवाई की अगली तिथि निर्धारित की गई।

इसी प्रकार, रामगढ़ निवासी बेनी राम मांझी को भूदान में दी गई जमीन की लगान मिरधारन कर रसीद देने से संबंधित शिकायत का भी आयोग की ओर से समाधान किया गया। वहीं, सीसीएल से संबंधित मामले में कालेश्वर गंझू की ओर से की गई शिकायत मामले में आयोग की ओर से मुआवजा भुगतान करने का निर्देश दिया गया।

सीसीएल ने शिकायतकर्ता को दी मुआवजे का भुगतान पर सहमति

सीसीएल के सीएमडी ने भी शिकायतकर्ता को मुआवजे का भुगतान करने पर सहमति दी। साथ ही शिकायतकर्ता को नौकरी देने के मामले में आयोग के समक्ष कहा कि जांच के बाद शिकायतकर्ता को नौकरी देने पर विचार किया जाएगा।

आयोग को बताया गया कि रूपा कुमारी ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के विज्ञापन तहत स्नातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षक (हिंदी) प्रतियोगिता परीक्षा में आवेदन किया था। परीक्षा दिनांक 09 मार्च 2024 को आयोजित हुई और परिणाम घोषित होने के बाद उन्हें 16 मार्च 2024 को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया, जहां उनके सभी दस्तावेज सही पाए गए।

इसके बावजूद दिनांक 14 जून 2024 को प्रकाशित अंतिम मेरिट सूची से उनका नाम हटा दिया गया। अभ्यावेदक का आरोप है कि झारखंड सरकार के संकल्प के अनुसार आदिम जनजातियों को दिए जाने वाले आरक्षण प्रावधानों का पालन नहीं किया गया, जिससे पात्र अभ्यर्थी चयन से वंचित हो गया।

वहीं जेएसएससी की ओर से बताया गया कि अनुसूचित जनजातियों के लिए 26 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है, जिसमें से न्यूनतम 02 प्रतिशत पद आदिम जनजातियों के लिए क्षैतिज आरक्षण के रूप में सुरक्षित हैं। पीजीटी (हिंदी) के एक पद पर आदिम जनजाति के लिए आरक्षित रिक्ति में रूपा कुमारी का चयन नहीं किया गया, क्योंकि मेधा क्रमांक 772 पर स्थित एक अन्य आदिम जनजाति अभ्यर्थी सामान्य मेधा सूची में ही चयनित हो गया था। नियमों के अनुसार यदि आदिम जनजाति का अभ्यर्थी सामान्य मेधा सूची में चयनित हो जाता है, तो अलग से आरक्षित पद पर चयन आवश्यक नहीं होता। यदि ऐसे पद रिक्त रह जाते हैं, तो उन्हें अन्य अनुसूचित जनजाति अभ्यर्थियों से भरा जा सकता है और इन पदों पर बैकलॉग लागू नहीं होता।

इस दौरान आरोप लगाया गया है कि कुल 163 पदों में से अनुसूचित जनजाति के लिए 43 पद होने चाहिए थे, जबकि केवल 37 पद दिए गए। साथ ही 02 प्रतिशत आरक्षण के अनुसार आदिम जनजातियों को 03 पद मिलने चाहिए थे, जबकि केवल 01 पद ही दिया गया।

आरोप लगाया कि एक कार्यरत शिक्षक को सीधी भर्ती में चयनित किया गया, जो नियमों के विपरीत है और एक रिक्त पद पर रूपा कुमारी को नियुक्त किया जाना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak