जम्मू की शैक्षणिक आकांक्षाओं की अनदेखी का लगाया आरोप, मुख्यमंत्री से मांगा स्पष्ट रोडमैप
जम्मू, 13 जून (हि.स.)। भाजपा प्रवक्ता एवं जम्मू नगर निगम की पूर्व उपमहापौर पूर्णिमा शर्मा ने जम्मू में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एनएलयू) की स्थापना के लंबे समय से लंबित मुद्दे पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार की आलोचना करते हुए इसे जम्मू के युवाओं और विधि समुदाय के प्रति उदासीन रवैया बताया है। एक बयान में पूर्णिमा शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की हालिया नई दिल्ली यात्रा ने सरकार की प्राथमिकताओं को उजागर कर दिया है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और नागरिक उड्डयन मंत्री के साथ बैठकों में मुख्यमंत्री ने राज्य का दर्जा, प्रशासन, हवाई अड्डों के संचालन और संपर्क व्यवस्था जैसे विभिन्न मुद्दे उठाए लेकिन जम्मू में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण विषय पर कोई चर्चा नहीं की।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के हजारों कानून के छात्र आज भी राष्ट्रीय स्तर की विधि शिक्षा प्राप्त करने के लिए देश के विभिन्न राज्यों की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटियों में प्रवेश लेने को मजबूर हैं जिससे उन पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। इसके बावजूद राज्य में ऐसी प्रतिष्ठित संस्था स्थापित करने के लिए सरकार ने कोई गंभीर पहल नहीं दिखाई है। शर्मा ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री विभिन्न प्रशासनिक और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार के साथ चर्चा कर सकते हैं तो युवाओं के भविष्य को संवारने वाली नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के मुद्दे को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई।
उन्होंने कहा कि जम्मू में एनएलयू की स्थापना की मांग पूरी तरह तर्कसंगत है क्योंकि यहां बेहतर संपर्क व्यवस्था, पर्याप्त बुनियादी ढांचा और क्षेत्र के शैक्षणिक केंद्र के रूप में मजबूत पहचान मौजूद है। उन्होंने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस इस मुद्दे का समाधान करने के बजाय इसे राजनीतिक रंग देने और क्षेत्रीय विभाजन पैदा करने का प्रयास कर रही है।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा