जनगणना 2027 में ओबीसी के लिए अलग कॉलम न होने पर संगठनों ने जताई चिंता
जम्मू, 22 जून (हि.स.)। विभिन्न ओबीसी संगठनों के प्रतिनिधियों ने जनगणना-2027 के प्रथम चरण में उपयोग किए जा रहे हाउस लिस्टिंग और हाउस डिमार्केशन फॉर्म में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए अलग कॉलम न होने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठनों का कहना है कि फॉर्म में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए अलग कॉलम तो दिए गए हैं लेकिन ओबीसी समुदाय के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
वक्ताओं ने कहा कि ओबीसी की अलग गणना न होने से करोड़ों पिछड़े वर्ग के नागरिकों की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक स्थिति का सही आकलन नहीं हो पाएगा जिससे कल्याणकारी योजनाओं और बजटीय प्रावधानों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर सहित देशभर में ओबीसी समुदाय को उनकी वास्तविक आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व और लाभ नहीं मिल पा रहे हैं।
प्रतिनिधियों ने बताया कि देश में अंतिम व्यापक जातिगत जनगणना वर्ष 1931 में हुई थी और मंडल आयोग ने भी उसी आंकड़े के आधार पर अपनी सिफारिशें दी थीं। उन्होंने कहा कि सटीक जनसंख्या आंकड़ों के अभाव में ओबीसी समुदाय सरकारी नौकरियों, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और स्थानीय निकायों में आरक्षण के अपने अधिकारों से वंचित रह रहा है। बैठक में केंद्र सरकार से जनगणना 2027 के सभी प्रपत्रों में ओबीसी के लिए अलग श्रेणी शामिल करने तथा व्यापक जातिगत जनगणना कराने की मांग की गई। संगठनों ने चेतावनी दी कि जब तक ओबीसी समुदाय को संवैधानिक अधिकार, सामाजिक न्याय और पारदर्शी गणना प्रक्रिया सुनिश्चित नहीं की जाती तब तक उनका लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रहेगा।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा