कठुआ में धूमधाम से मनाया गया विजयादशमी पर्व, श्रीराम के जयकारों के बीच रावण मेघनाथ और कुंभकरण के पुतलों का दहन
कठुआ, 20 अक्टूबर (हि.स.)। बुराई पर अच्छाई की जीत, असत्य पर सत्य की विजय और अधर्म पर धर्म की स्थापना के प्रतीक विजयादशमी एवं दशहरा पर्व को जिला कठुआ में हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर कठुआ शहर के प्रसिद्ध रामलीला मैदान में आयोजित दशहरा मेले में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। भगवान श्रीराम के जयकारों के बीच रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतलों का दहन किया गया। इस दौरान पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल और उत्सव के रंगों से सराबोर नजर आया।
कठुआ के रामलीला मैदान में पिछले नौ दिनों से रामलीला का मंचन किया जा रहा था। विजयादशमी के अवसर पर पुरानी परंपरा के अनुसार यहां भव्य दशहरा मेले का आयोजन हुआ। रामलीला मैदान में रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के विशाल पुतले स्थापित किए गए थे जिन्हें शाम को भगवान श्रीराम के प्रतीकात्मक बाण से अग्नि के हवाले किया गया। पुतलों के दहन के साथ ही मैदान में उपस्थित लोगों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए और बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाया।
कठुआ के रामलीला मैदान में दशहरा मेले का आयोजन पिछले करीब 80 वर्षों से होता आ रहा है। यह मेला शहर की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। हर वर्ष की तरह इस बार भी कठुआ शहर के साथ-साथ आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग मेला देखने पहुंचे। मेले में बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों की मौजूदगी ने उत्सव की रौनक को और बढ़ा दिया। विजयादशमी के अवसर पर रामलीला मंचन के दौरान मेघनाथ और कुंभकरण वध सहित रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों का मंचन किया गया। कलाकारों ने भगवान श्रीराम की वीरता, धर्म के प्रति समर्पण और अधर्म के विनाश की गाथा को जीवंत किया। इसके बाद रावण दहन के साथ नौ दिनों से चल रहे रामलीला मंचन का समापन हुआ।
दशहरा मेले में खाने-पीने की दुकानों के साथ खिलौनों, उपहारों और अन्य सामान की दुकानें भी सजाई गई थीं। विशेषकर हलवाइयों की दुकानों पर लोगों की खूब भीड़ देखने को मिली। लोग अपने घरों के लिए जलेबी, पकौड़े, पापड़ और अन्य खाद्य सामग्री खरीदते नजर आए। बच्चों ने मेले में लगी दुकानों और मनोरंजन के साधनों का आनंद लिया जबकि परिवारों ने एक साथ मेले में घूमकर पर्व की खुशियां साझा कीं। दशहरा मेले में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। शहर के प्रमुख चैकों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस तथा यातायात पुलिस के जवान तैनात रहे। यातायात को सुचारू बनाए रखने और जाम की स्थिति से बचने के लिए विशेष प्रबंध किए गए ताकि मेले में आने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
जिला कठुआ के अन्य क्षेत्रों में भी विजयादशमी का पर्व उत्साह के साथ मनाया गया। बिलावर, बसोहली, बनी और हीरानगर सहित विभिन्न स्थानों पर रावण दहन कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन क्षेत्रों में भी मेलों का आयोजन हुआ जिनमें स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। पूरे जिले में दशहरे को लेकर उत्साह और उल्लास का माहौल देखने को मिला। दशहरा केवल रावण के पुतले के दहन का पर्व नहीं बल्कि अपने भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध, लोभ और अन्य बुराइयों को समाप्त करने का संदेश भी देता है। भगवान श्रीराम की विजय हमें सिखाती है कि सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति अंततः सफलता प्राप्त करता है। विजयादशमी का वास्तविक संदेश तभी सार्थक होगा जब हम अपने जीवन में बुराइयों का त्याग कर सत्य, प्रेम, सद्भाव और मानवता को अपनाएंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया