वेदों के अनुसार ही करें ईश्वर की उपासना-स्वामी राम स्वरूप जी
कठुआ, 18 जून (हि.स.)। वेद मंदिर योल में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 68वें दिन योगाचार्य स्वामी राम स्वरूप जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य अपनी सुविधा अनुसार भक्ति के विभिन्न मार्गों को अपनाकर ईश्वर की पूजा करता है लेकिन यह वेदसम्मत नहीं है।
उन्होंने कहा कि परमेश्वर स्वयं सृष्टि की रचना करता है और अपने ज्ञान, गुण, कर्म तथा उपासना की विधि का विधान चारों वेदों में देता है। आज वेदों के अनुसार ईश्वर का सही स्वरूप और उपासना लगभग लुप्त हो चुकी है जिसके कारण मानव जीवन में दुख बढ़ रहे हैं। स्वामी जी ने कहा कि चारों वेद सत्य परमेश्वर से उत्पन्न हैं इसलिए वे पूर्णत सत्य हैं। स्वामी राम स्वरूप जी ने अथर्ववेद काण्ड 20 सूक्त 34 का उल्लेख करते हुए परमेश्वर के स्वरूप को समझाया। उन्होंने बताया कि सृष्टि की रचना के बाद परमेश्वर ने पृथ्वी, सूर्य, चन्द्रमा और अन्य ग्रहों को अपने अनंत ज्ञान और शक्ति से नियमों में बांधा है जिससे वे बिना किसी सहारे आकाश में संतुलित रूप से गतिमान रहते हैं और आपस में टकराते नहीं।
उन्होंने कहा कि जो दुष्टों को दंड देता है, सज्जनों की रक्षा करता है, सबका पालन करता है और समस्त जीवों को अपनी आज्ञा में रखता है वही परमेश्वर है। परमेश्वर ही जल सूर्य और जीवन के आवश्यक तत्वों का सृजन करता है तथा वही समस्त जगत का संचालन करता है। स्वामी जी ने आगे कहा कि वेदों के अनुसार परमेश्वर सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापक और अनंत गुणों से युक्त है। वही सृष्टि का निर्माण पालन और निश्चित समय पर संहार करता है और यह चक्र अनादि काल से निरंतर चल रहा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे वेदों में वर्णित परमेश्वर के ज्ञान, गुण, कर्म और उपासना विधि को समझकर ही पूजा करें। अपनी इच्छा से की गई उपासना को उन्होंने वेद-विरुद्ध बताते हुए कहा कि ऋग्वेद मंत्र 10/125/4 के अनुसार ऐसा करना परमेश्वर को अप्रसन्न करता है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और वेद ज्ञान के प्रति गहरी रुचि दिखाई।
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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया