श्रीनगर में बड़े उत्साह के साथ मनाया गया विश्व आईवीएफ दिवस 2026
श्रीनगर , 27 जुलाई (हि.स.)।श्रीनगर में विश्व आईवीएफ दिवस 2026 को बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। इंडियन फर्टिलिटी सोसाइटी (आईएफएस) ने मेड एज आईवीएफ सेंटर के सहयोग से एक उच्चस्तरीय वैज्ञानिक कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें जम्मू-कश्मीर के प्रमुख प्रजनन विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, भ्रूणविज्ञानी और स्वास्थ्य सेवा पेशेवर एक साथ आए।
इस आयोजन ने प्रजनन चिकित्सा में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने और क्षेत्र में प्रजनन देखभाल को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित किया। कार्यक्रम में प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संकाय सदस्य प्रो. डेनी सक्कास (यूएसए) और डॉ. डेविड मोर्टिमर (कनाडा) शामिल थे जो प्रजनन चिकित्सा और नैदानिक भ्रूणविज्ञान में विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त अग्रणी हैं। उन्होंने सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (एआरटी) में नवीनतम वैज्ञानिक प्रगति, उभरती प्रौद्योगिकियों और साक्ष्य-आधारित प्रथाओं पर ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिए जिसमें आईवीएफ सफलता दर में सुधार और रोगी परिणामों को अनुकूलित करने के लिए नवीन रणनीतियों पर प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में से एक आईयूआई बनाम आईवीएफ - सीमा रेखा कहां खींची जाए? शीर्षक पर एक आकर्षक पैनल चर्चा थी। आईएफएस के राष्ट्रीय संयोजक और मेड एज आईवीएफ सेंटर के प्रबंध निदेशक डॉ. सैयद सज्जाद हुसैन और प्रख्यात स्त्री रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. महमूदा हामिद वानी द्वारा संयुक्त रूप से संचालित इस चर्चा में व्यक्तिगत रोगी की विशेषताओं, बांझपन के कारकों और वर्तमान वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर सबसे उपयुक्त प्रजनन उपचार के चयन पर ध्यान केंद्रित किया गया साथ ही व्यक्तिगत, नैतिक और रोगी-केंद्रित देखभाल के महत्व पर भी बल दिया गया।
वैज्ञानिक कार्यक्रम को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली जिसमें केंद्र शासित प्रदेश के कई स्त्री रोग विशेषज्ञों, बांझपन विशेषज्ञों, भ्रूणविज्ञानियों और चिकित्सा पेशेवरों ने भाग लिया। इस आयोजन ने अकादमिक आदान-प्रदान, पेशेवर नेटवर्किंग और निरंतर चिकित्सा शिक्षा के लिए एक उत्कृष्ट मंच प्रदान किया जिससे जम्मू-कश्मीर में प्रजनन चिकित्सा के बढ़ते महत्व की पुष्टि हुई।
सभा को संबोधित करते हुए आयोजकों ने इस बात पर जोर दिया कि बांझपन विश्व स्तर पर लाखों दंपतियों को प्रभावित करता है और जन जागरूकता बढ़ाने, समय पर मूल्यांकन और उन्नत प्रजनन उपचारों तक पहुंच से माता-पिता बनने की संभावनाओं में काफी सुधार हो सकता है। उन्होंने प्रजनन स्वास्थ्य सेवा में वैज्ञानिक उत्कृष्टता, नैतिक व्यवहार, नवाचार और सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए इंडियन फर्टिलिटी सोसाइटी और मेड एज आईवीएफ सेंटर की प्रतिबद्धता को दोहराया।
समारोह का समापन चिकित्सा जगत द्वारा निरंतर शिक्षा, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और करुणापूर्ण, साक्ष्य-आधारित देखभाल के माध्यम से क्षेत्र में प्रजनन सेवाओं को और मजबूत करने के संकल्प के साथ हुआ जिससे आधुनिक प्रजनन चिकित्सा के माध्यम से अपना परिवार बसाने की इच्छा रखने वाले अनगिनत दंपतियों को नई उम्मीद मिली।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता