वेद ज्ञान से ही मानवता का कल्याण संभव-योल वेद मन्दिर में यज्ञ के 54वें दिन स्वामी राम स्वरूप का संदेश
कठुआ, 04 जून (हि.स.)। वेद मन्दिर, योल में आयोजित 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 54वें दिन स्वामी राम स्वरूप जी योगाचार्य ने श्रद्धालुओं को ऋग्वेद मन्त्र 10/53/6 का अर्थ समझाते हुए कहा कि ईश्वर ने सम्पूर्ण मानव जाति को वेद मन्त्रों के मनन-चिन्तन का आदेश दिया है।
उन्होंने बताया कि महाभारत काल तक समाज में वेदाध्ययन, यज्ञ, अग्निहोत्र और विद्वानों के संग से शांति और समृद्धि बनी रही। किन्तु महाभारत युद्ध के बाद इन शुभ कर्मों का त्याग होने से वेद ज्ञान का प्रकाश क्षीण हो गया और संसार में अज्ञान का विस्तार हुआ। स्वामी जी ने कहा कि वेद ज्ञान के बिना मनुष्य ईश्वर के बताए कल्याणकारी मार्ग को नहीं समझ सकता और भटककर अपना अमूल्य जीवन नष्ट कर देता है।
उन्होंने यजुर्वेद मन्त्र 4/1 का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य को विद्वानों के संग रहकर चारों वेदों का अध्ययन करना चाहिए जिससे दुःखों का नाश और जीवन में समृद्धि आए। उन्होंने आगे कहा कि यजुर्वेद मन्त्र 1/1 के अनुसार मनुष्य का जन्म यज्ञ और श्रेष्ठ कर्मों के लिए हुआ है जबकि भौतिक कार्य गौण हैं। स्वामी जी ने श्रद्धालुओं से वेदों का अध्ययन कर विद्वान बनने का आह्वान किया।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया