हमें उम्मीद है कि आशूरा जुलूस जल्द ही अपने मूल पारंपरिक मार्ग पर लौटेगा: मुख्यमंत्री उमर

 

श्रीनगर, 26 जून (हि.स.)।मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को आशा व्यक्त की कि यौम-ए-आशूरा जुलूस जल्द ही अपने मूल पारंपरिक मार्ग पर बहाल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इसे पूरी तरह से बहाल करने के लिए प्रयास जारी रखेगी। ज़दीबल में मातम मनाने वालों के साथ शामिल होने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उमर ने मीडिया को बताया कि मुहर्रम का महीना, विशेष रूप से दसवां दिन यौम-ए-आशूरा, धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन (एएस) का बलिदान और उनसे मिलने वाली शिक्षाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। जब तक हम उन शिक्षाओं को याद रखेंगे, यह हमारे कल्याण के लिए होगा। लेकिन जब हम उन्हें भूल जाते हैं तो अंततः हम विनाश और बर्बादी का सामना करते हैं।

ऐतिहासिक आशूरा जुलूस मार्ग की बहाली का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हम पूरी उम्मीद करते हैं कि वह दिन जल्द आएगा जब आशूरा जुलूस अपने मूल पारंपरिक मार्ग पर बहाल हो जाएगा। हमने अतीत में जुलूस को उसके ऐतिहासिक मार्ग पर पुनर्जीवित करने के कई प्रयास किए लेकिन हम पूरी तरह सफल नहीं हो सके। हम भविष्य में भी अपने प्रयास जारी रखेंगे।

इससे पहले दिन में मुख्यमंत्री ज़ादिबल में यौम-ए-आशूरा के मातमियों के साथ शामिल हुए और नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा स्थापित एक सबील (जलपान केंद्र) पर पानी और दूध वितरित किया। उनके साथ उनके सलाहकार नासिर असलम वानी और ज़ादिबल के विधायक तनवीर सादिक भी थे। उन्होंने मातमियों और स्वयंसेवकों से बातचीत भी की और आशूरा समारोह के तहत जलपान वितरण में भाग लिया।

गौरतलब है कि शुक्रवार को श्रीनगर भर में हजारों मातमियों ने यौम-ए-आशूरा मनाया जो कर्बला की लड़ाई में हजरत इमाम हुसैन (एएस) और उनके साथियों की शहादत की याद में मनाया जाता है। व्यापक सुरक्षा व्यवस्था के बीच बोताकादल से जादिबल तक आशूरा का पारंपरिक जुलूस निकाला गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता