यजुर्वेद के मंत्रों से जागी वैदिक चेतना, अमृत कथा का छठा दिन ज्ञानमय
कठुआ, 09 अगस्त (हि.स.)। आर्य समाज मंदिर कठुआ में चल रही 28वीं अमृत कथा के छठे दिन का वातावरण वैदिक मंत्रों, आध्यात्मिक ऊर्जा और ज्ञान की गूंज से सराबोर रहा।
पूजनीय सुश्री गायत्री देवी जी ने अपने प्रेरणादायी प्रवचन में यजुर्वेद के मंत्रों में निहित जीवनोपयोगी संदेशों को सरल और सहज भाषा में श्रद्धालुओं तक पहुँचाया।
उन्होंने कहा कि वेद संपूर्ण मानवता के कल्याण का सार्वभौमिक ज्ञान हैं। यजुर्वेद मनुष्य को शुद्ध कर्म, कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और लोकहित की भावना के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है। उन्होंने मंत्रों का शुद्ध उच्चारण करते हुए उनके गूढ़ अर्थ को दैनिक जीवन से जोड़कर समझाया जिससे श्रद्धालुओं को वैदिक ज्ञान का नया दृष्टिकोण मिला। अपने प्रवचन में उन्होंने स्पष्ट किया कि यज्ञ केवल वेदी तक सीमित नहीं बल्कि निःस्वार्थ भाव से समाज, परिवार और राष्ट्र के हित में किया गया हर श्रेष्ठ कर्म भी यज्ञ की व्यापक भावना को दर्शाता है।
उन्होंने जीवन में विचार, वाणी और कर्म की पवित्रता अपनाने का संदेश दिया। पूजनीय गायत्री देवी जी ने महर्षि दयानंद सरस्वती के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने वेदों के मूल स्वरूप को समाज के सामने रखकर अंधविश्वास और रूढ़ियों से ऊपर उठने तथा सत्य और तर्क पर आधारित जीवन जीने की प्रेरणा दी। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि कथा से प्राप्त ज्ञान को केवल सुनने तक सीमित न रखें बल्कि उसे अपने पारिवारिक जीवन, बच्चों के संस्कार और दैनिक व्यवहार में अपनाएं। प्रवचन के उपरांत प्रस्तुत भजनों ने वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया जिसमें श्रद्धालुओं ने पूरे भाव के साथ सहभागिता की।
कार्यक्रम में आर्य समाज कठुआ के संरक्षक भारत भूषण, ज्ञान सिंह पठानिया, सेवानिवृत्त मोहिंदर शर्मा, मूल राज, शिक्षिका शीतल शर्मा, वीना देवी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आर्य समाज कठुआ के प्रधान बिशन भारती ने पूजनीय गायत्री देवी जी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अमृत कथा के माध्यम से लोगों को वेदों के ज्ञान से जुड़ने का सुअवसर मिल रहा है।
उन्होंने सभी से आगामी दिनों में भी परिवार सहित अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की।
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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया