17 अप्रैल को मनाई जाएगी वैशाख अमावस्या, स्नान-दान और पितृ तर्पण का विशेष महत्व
जम्मू, 15 अप्रैल (हि.स.)। वैशाख मास की अमावस्या इस वर्ष 17 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जाएगी। श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं ज्योतिषाचार्य महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि धार्मिक दृष्टि से इस दिन का अत्यंत महत्व है। इस अवसर पर पितरों के पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य करना विशेष फलदायी माना जाता है। उन्होंने जानकारी दी कि अमावस्या तिथि का आरंभ 16 अप्रैल 2026 को रात्रि 08:12 बजे होगा और इसका समापन 17 अप्रैल को शाम 05:22 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार 17 अप्रैल को ही अमावस्या मनाना शुभ रहेगा।
इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, पितृ तर्पण और दान करने से पापों का नाश और पुण्य की प्राप्ति होती है। यदि नदी स्नान संभव न हो, तो घर पर गंगाजल युक्त जल से स्नान कर श्रद्धा अनुसार दान करना भी लाभकारी है। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि मछलियों को आटे की गोलियां खिलाना, पीपल वृक्ष पर जल और तिल अर्पित करना, सूर्य को अर्घ्य देना तथा भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करना विशेष फल देता है। साथ ही ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को भोजन कराना भी शुभ माना गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस दिन तामसिक भोजन, नशा, अशुद्ध वस्त्र और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। राशि अनुसार दान करने से भी विशेष लाभ मिलता है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और पितृ कृपा प्राप्त होती है।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा