वेद ज्ञान से ही संभव है ईश्वर की सच्ची उपासना-स्वामी राम स्वरूप जी

 


कठुआ, 31 मई (हि.स.)। वेद मन्दिर योल में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 50वें दिन योगाचार्य स्वामी राम स्वरूप जी ने श्रद्धालुओं को सामवेद मन्त्र 350 का भाव समझाते हुए कहा कि परमेश्वर पूर्णतः शुद्ध है और उसकी स्तुति भी शुद्ध वेद मन्त्रों के माध्यम से ही की जानी चाहिए।

स्वामी जी ने बताया कि वेदों का संदेश है कि पहले मनुष्य परमेश्वर को वेदों से जाने और उसके पश्चात उसकी भक्ति करे। यजुर्वेद मन्त्र 40/8 का उल्लेख करते हुए उन्होंने ईश्वर को निराकार और कायारहित बताया तथा कहा कि ईश्वर को भौतिक रूप देकर पूजा करना वेदों के विरुद्ध है। स्वामी जी ने आगे कहा कि मनुष्य यदि अपने मन और बुद्धि से किसी को भी परमेश्वर मानकर पूजा करता है तो यह वेदों के अनुसार ईश्वर का अपमान है। सामवेद के विभिन्न मन्त्रों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि ईश्वर से शुद्धता, सत्कर्म और दुष्टों के नाश की प्रार्थना करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ईश्वर की स्तुति केवल वेद वाणी से ही संभव है किन्तु कलियुग में मनुष्य वेदों के मार्ग से भटक गया है जिसके कारण आज उसे पूर्व युगों जैसा सुख प्राप्त नहीं हो पा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया