बलोड़ नर्सरी में लैंटाना उन्मूलन पर प्रशिक्षण, वैज्ञानिक तरीकों का प्रदर्शन

 


कठुआ, 27 मार्च (हि.स.)। वन विभाग द्वारा कठुआ और सांबा वन प्रभागों के समन्वय से बलोड़ नर्सरी में लैंटाना उन्मूलन पर एक प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पूर्वी सर्कल के वन संरक्षक प्रदीपचंद्र वाहुले मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और फील्ड स्टाफ को लैंटाना हटाने के वैज्ञानिक तरीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम का आयोजन डीएफओ कठुआ अंकित सिन्हा के मार्गदर्शन में किया गया जिसमें आईएफएस प्रशिक्षु अनुशा कोल्ली भी उपस्थित रहीं। शुरुआत में प्रशिक्षण के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला गया जिसके बाद लैंटाना कैमारा की पहचान, फैलाव और इसके पारिस्थितिक प्रभावों पर विस्तृत जानकारी दी गई। विशेष रूप से बताया गया कि लैंटाना वन पारिस्थितिकी तंत्र के लिए हानिकारक है जिससे प्राकृतिक पुनर्जनन प्रभावित होता है, जैव विविधता घटती है और वन्यजीवों के आवास को नुकसान पहुंचता है।

प्रशिक्षण के दौरान ‘कट रूटस्टॉक’ तकनीक पर जोर दिया गया जिसमें पौधे की जड़ को जमीन के नीचे से काटकर दोबारा उगने से रोका जाता है। हटाए गए पौधों को उल्टा रखकर सुखाया जाता है, ताकि पुनः वृद्धि न हो सके। साथ ही खाली जगहों पर घास, बांस व अन्य स्थानीय प्रजातियों के रोपण पर भी बल दिया गया। कार्यक्रम में फील्ड डेमो और हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग के साथ इंटरैक्टिव सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें फील्ड स्तर की चुनौतियों और बेहतर उपायों पर चर्चा हुई। वन विभाग ने आक्रामक प्रजातियों के प्रभावी नियंत्रण और वन पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आगे भी जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया