कठुआ शहर में चरमराई यातायात व्यवस्था-मुख्य मार्गों पर खड़े ट्रक बन रहे जाम का कारण, नो-एंट्री व्यवस्था लागू करने की मांग
कठुआ, 03 सितंबर (हि.स.)। पंजाब और हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटे जम्मू-कश्मीर के महत्वपूर्ण जिले कठुआ के जिला मुख्यालय शहर में यातायात व्यवस्था लगातार बिगड़ती जा रही है। शहर के प्रमुख मार्गों पर दिनभर भारी मालवाहक वाहनों की आवाजाही और सड़क किनारे ट्रकों को खड़ा कर माल उतारने-चढ़ाने से आए दिन जाम की स्थिति पैदा हो रही है। इसके बावजूद अब तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
कालीबाड़ी से मुखर्जी चौक, सावन चक, हटली मोड़ तथा कठुआ ड्रीम पार्क और आसपास के प्रमुख मार्ग शहर की यातायात व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ियां हैं। इन मार्गों पर अक्सर बड़े-बड़े ट्रक सड़क किनारे खड़े दिखाई देते हैं। कई स्थानों पर मालवाहक वाहन सड़क पर ही खड़े कर माल उतारा और चढ़ाया जाता है जिससे यातायात प्रभावित होने के साथ राहगीरों और वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
कालीबाड़ी से मुखर्जी चौक का मार्ग विशेष रूप से व्यस्त रहता है। इसी मार्ग पर जिला सचिवालय, गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज कठुआ, एसएसपी कार्यालय, छात्रावास, निजी स्कूलों सहित कई महत्वपूर्ण संस्थान स्थित हैं। सुबह, दोपहर और शाम के समय विद्यार्थियों, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे समय में भारी वाहनों की आवाजाही और सड़क किनारे ट्रकों के खड़े रहने से जाम के साथ दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है। इसी तरह कठुआ ड्रीम पार्क से जुड़े मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में भी ट्रांसपोर्ट कार्यालयों के कारण बड़े मालवाहक वाहनों की आवाजाही रहती है। ट्रांसपोर्ट कार्यालय शहर के प्रमुख मार्गों पर होने के चलते कई बार वाहन सड़क पर ही खड़े कर माल उतारते-चढ़ाते हैं जिससे यातायात बाधित होता है।
शहर के वरिष्ठ नागरिकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि कठुआ में भी बड़े शहरों की तर्ज पर भारी वाहनों के लिए नो-एंट्री व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। उनका सुझाव है कि स्कूल और सरकारी कार्यालयों के खुलने से लेकर बंद होने तक व्यस्त समय में भारी मालवाहक वाहनों को शहर के मुख्य मार्गों पर प्रवेश की अनुमति न दी जाए। लोगों का कहना है कि भारी वाहनों के लिए शहर के बाहर से वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किया जा सकता है ताकि आवश्यक माल की आवाजाही भी प्रभावित न हो और शहर के अंदर यातायात व्यवस्था सुचारू बनी रहे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और संबंधित विभागों को संयुक्त बैठक कर इस गंभीर समस्या पर विचार करना चाहिए। शहर में भारी वाहनों के प्रवेश का समय निर्धारित करने के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट कार्यालयों को शहर के भीड़भाड़ वाले मुख्य मार्गों से बाहर स्थानांतरित करने और माल उतारने-चढ़ाने के लिए उचित जगह निर्धारित करने की जरूरत है। लोगों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन कठुआ शहर की बिगड़ती यातायात व्यवस्था को गंभीरता से लेते हुए भारी वाहनों के लिए नो-एंट्री व्यवस्था और वैकल्पिक मार्ग को लेकर जल्द ठोस निर्णय लेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया