जम्मू-कश्मीर के लिए 2019 नहीं, 1947 के वादे आधार होने चाहिए- सज्जाद लोन
श्रीनगर, 28 सितंबर (हि.स.)। पीपल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और विधायक सज्जाद लोन ने सोमवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दर्जे और भारत के साथ इसके संबंधों पर किसी भी चर्चा के लिए 1947 में किए गए वादे ही आधार (रेफरेंस पॉइंट) होने चाहिए।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बोलते हुए लोन ने कहा कि प्रधानमंत्री और सुप्रीम कोर्ट के प्रति उनका पूरा सम्मान है लेकिन उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भारत में जम्मू-कश्मीर की मौजूदगी 1947 में यहां के लोगों से किए गए वादों पर टिकी है। लोन ने कहा भारत के प्रधानमंत्री और भारत के सुप्रीम कोर्ट के प्रति मेरा पूरा सम्मान है लेकिन अगर हम आज यहां हैं तो ऐसा प्रधानमंत्री या सुप्रीम कोर्ट द्वारा किए गए किसी वादे की वजह से नहीं है। हम यहां 1947 में जम्मू-कश्मीर के लोगों से किए गए वादों की वजह से हैं।
उन्होंने कहा कि मूल ढांचे में एक ऐसी व्यवस्था की कल्पना की गई थी जिसमें जम्मू-कश्मीर के लोगों की अपनी शासन-व्यवस्था में सार्थक भागीदारी हो और उन्हें स्वायत्तता तथा अपने निर्णय लेने की शक्तियां प्राप्त हों। जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश के रूप में पुनर्गठित करने के केंद्र के फैसले के संवैधानिक और कानूनी आधार पर सवाल उठाते हुए लोन ने पूछा कि मुझे बताइए जिस केंद्र सरकार ने हमारा दर्जा घटाया क्या यह कानून के दायरे में है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का ज़िक्र करते हुए लोन ने कहा कि कोर्ट ने उन सभी सवालों का जवाब नहीं दिया है कि क्या ऐसी परिस्थितियों में किसी राज्य को केंद्र शासित प्रदेश में बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर पर चर्चा करते समय विधानसभा को अपना ऐतिहासिक आधार (रेफरेंस पॉइंट) नहीं बदलना चाहिए। लोन ने कहा कि इस विधानसभा में आधार 1947 होना चाहिए, 2019 नहीं। हम आधार नहीं बदल सकते। हम इतिहास का स्वरूप नहीं बदल सकते।
लोन ने यह भी कहा कि समय के साथ राजनीतिक दौर और सरकारें बदलती रहेंगी लेकिन जम्मू-कश्मीर के लोगों से किए गए ऐतिहासिक वादों को हमेशा ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा यह एक दौर है। कितने ही लोग आए और कितने ही चले गए। वे भी एक दिन चले जाएंगे। आप भी एक दिन चले जाएंगे। हम भी एक दौर से गुज़र रहे हैं। लोन ने आगे कहा हमें आधार बिंदु (रेफरेंस पॉइंट) नहीं बदलना चाहिए। आधार बिंदु 1947 ही होना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / राधा पंडिता