उपराज्यपाल ने जम्मू विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय अध्ययन, संस्कृति, बोलियों और भावनात्मक बुद्धिमत्ता केंद्र के कश्मीर अध्याय की आधारशिला रखी
श्रीनगर, 28 अक्टूबर(हि.स.)। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आज जम्मू विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय अध्ययन, संस्कृति, बोलियों और भावनात्मक बुद्धिमत्ता केंद्र के कश्मीर अध्याय की आधारशिला रखी।
सभा को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि यह केंद्र क्षेत्रीय अध्ययन, संस्कृति, बोलियों और भावनात्मक बुद्धिमत्ता का एक अनूठा और प्रगतिशील संगम है।
जम्मू-कश्मीर की समृद्ध सभ्यतागत विरासत पर प्रकाश डालते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि इस पहल से क्षेत्र की विविध बौद्धिक और भाषाई परंपराओं को संरक्षित करते हुए सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और मानवीय संबंधों को मजबूती मिलेगी।
उपराज्यपाल ने कहा कि किसी क्षेत्र को केवल भूगोल से नहीं समझा जा सकता।
उन्होंने कहा कि भाषाएँ, लोककथाएँ, सांस्कृतिक प्रथाएँ, कलाएँ, आस्था, परंपराएँ और जीवन के अनुभव मिलकर किसी स्थान की पहचान बनाते हैं। क्षेत्रीय ज्ञान को भावनात्मक बुद्धिमत्ता के साथ एकीकृत करना नए केंद्र की आत्मा का निर्माण करेगा और समाज और लोगों की गहरी समझ विकसित करने में सहायक होगाl
उपराज्यपाल ने कहा कि पांडुलिपियों का संरक्षण, डिजिटल अभिलेखागार का निर्माण, भाषाई मानचित्रण, नृवंशविज्ञान अध्ययन, तीर्थयात्रा और पर्यटन पर शोध, पर्वतीय पारिस्थितिकी, स्थानीय उद्यमिता और युवा विद्वानों के लिए छात्रवृत्तियाँ सहित केंद्र के व्यापक उद्देश्य विश्वविद्यालय के अनूठे प्रयास हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी पहल भावी पीढ़ियों के लिए ज्ञान का एक साझा भंडार बनाने में योगदान देंगी।
उपराज्यपाल ने समकालीन समय में ऐसे केंद्र को प्रासंगिक बनाने वाले चार प्रमुख कारकों पर भी जोर दिया। पहला, वैश्विक संपर्क और स्थानीय पहचान के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता, लुप्तप्राय भाषाओं और ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण की तात्कालिकता, जटिल चुनौतियों के लिए अंतःविषयक दृष्टिकोण का महत्व और शिक्षा में भावनात्मक कल्याण की बढ़ती मान्यता।
उन्होंने कहा कि जहाँ प्रौद्योगिकी समाजों को रूपांतरित कर रही है वहीं सांस्कृतिक जड़ों और मानवीय मूल्यों का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
तेजी से हो रहे तकनीकी परिवर्तन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में विश्वविद्यालयों की भूमिका पर बोलते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि भावनात्मक बुद्धिमत्ता और तकनीकी क्षमता एक दूसरे के पूरक हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य के लिए तैयार संस्थानों को निरंतर सीखने, अनुकूलनशीलता, नैतिक जागरूकता और बहुविषयक सहयोग को प्रोत्साहित करना चाहिए।
उपराज्यपाल ने यह भी कहा कि जम्मू विश्वविद्यालय के जम्मू परिसर में स्थित मुख्य केंद्र और इसकी कश्मीर शाखा में अनुसंधान के लिए एक आदर्श संस्थान के रूप में उभरने की क्षमता है जो ज्ञान सृजन, सांस्कृतिक संरक्षण और मानव-केंद्रित विकास में योगदान देते हुए जम्मू-कश्मीर के विश्वविद्यालयों की वैश्विक प्रतिष्ठा को बढ़ाएगी।
जम्मू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. उमेश राय, संभागीय आयुक्त कश्मीर अंशुल गर्ग, अनुसंधान अध्ययन की डीन डॉ. नीलू रोहमेट्रा, उप कार्यालय कश्मीर के निदेशक डॉ. गुनीत सिंह सूडान, योजना एवं विकास की डीन प्रो. संगीता गुप्ता और जम्मू विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य स्थापना दिवस समारोह में उपस्थित थे।
श्रीनगर के एसएसपी डॉ. जीवी संदीप चक्रवर्ती, बडगाम के उपायुक्त जतिन किशोर भी उपस्थित थे। इस अवसर पर आईजीएनसीए की क्षेत्रीय निदेशक सुश्री श्रुति अवस्थी, नागरिक एवं पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / राधा पंडिता