मुख्य सचिव ने जम्मू-कश्मीर के हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र को मजबूत करने के उपायों की समीक्षा की

 

श्रीनगर, 14 अगस्त(हि.स.)। लगभग 5 लाख कारीगरों और बुनकरों के पंजीकृत होने और अरबों डॉलर के हस्तशिल्प निर्यात के साथ जम्मू-कश्मीर अपने पारंपरिक शिल्पों के इर्द-गिर्द संस्थागत और बाजार पारिस्थितिकी तंत्र का लगातार विस्तार कर रहा है। मुख्य सचिव अटल दुल्लू ने आज केंद्र शासित प्रदेश में इस गति को और मजबूत करने के लिए चल रही पहलों की समीक्षा की।

समीक्षा बैठक में उद्योग एवं वाणिज्य आयुक्त सचिव, उद्योग निदेशक जम्मू, हस्तशिल्प एवं हथकरघा निदेशक जम्मू कश्मीर, जम्मू-कश्मीर हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम के प्रबंध निदेशक, राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान श्रीनगर, शिल्प विकास संस्थान और भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान व श्रीनगर के वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित थे।

मुख्य सचिव ने प्रयोगशालाओं के उन्नयन, शिल्प गांवों और साझा सुविधा केंद्रों के विकास ऊन प्रसंस्करण और परीक्षण सुविधाओं को मजबूत करने गुणवत्ता आश्वासन और जीआई-टैगिंग को बढ़ावा देने, साथ ही कारीगरों और बुनकरों के लिए बाजार संपर्क और संस्थागत ऋण तक पहुंच में सुधार लाने के उद्देश्य से शुरू की गई पहलों का विस्तृत मूल्यांकन किया।

मुख्य सचिव ने विभाग को जम्मू और कश्मीर दोनों मंडलों में चल रही सभी परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया यह देखते हुए कि इन निवेशों का लाभ जमीनी स्तर पर कारीगरों और व्यापक शिल्प पारिस्थितिकी तंत्र तक बिना किसी देरी के पहुंचना चाहिए।

उन्होंने गुणवत्ता परीक्षण और प्रमाणन तंत्र को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जिसमें प्रयोगशालाओं का उन्नयन, शिल्प गांवों का विकास, रंगाई और अन्य विशिष्ट गतिविधियों के लिए सीएफसी, ऊन प्रसंस्करण सुविधाएं, परीक्षण अवसंरचना और तैयार उत्पादों की जीआई-टैगिंग शामिल हैं।

दुल्लू ने स्थानीय युवाओं को राष्ट्रीय स्तर के संस्थान तक अधिक पहुंच प्रदान करने के लिए एनआईएफटी श्रीनगर में डिप्लोमा और प्रमाण पत्र कार्यक्रमों सहित व्यावसायिक और कौशल-उन्मुख पाठ्यक्रम शुरू करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि ऐसे पाठ्यक्रम कुशल कारीगरों की एक नई पीढ़ी तैयार करके पारंपरिक और लुप्तप्राय शिल्पों के संरक्षण और पुनरुद्धार में भी योगदान दे सकते हैं।

जीआई-टैग वाले उत्पादों के संबंध में मुख्य सचिव ने बाजार में पहुंचने वाले उत्पादों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए एक प्रभावी ट्रेसबिलिटी और ट्रैकिंग तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने विभाग को अब तक निर्मित और लेबल किए गए जीआई-टैग वाले उत्पादों की संख्या का स्पष्ट रिकॉर्ड सुनिश्चित करने और बनाए रखने का निर्देश दिया।

मुख्य सचिव ने व्यक्तिगत हस्तशिल्प उत्पादों के उत्पादन में लगने वाले कार्य घंटों और मेहनत का निर्धारण करने के लिए इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित तकनीक का उपयोग करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि इस तरह के आंकड़े कारीगरों को दिए जाने वाले पारिश्रमिक को उनके द्वारा लगाए गए समय और कौशल के अनुरूप सुनिश्चित करने में सहायक हो सकते हैं जिससे उनकी आय क्षमता की रक्षा हो सकेगी और पारंपरिक शिल्प युवा पीढ़ी के लिए आर्थिक रूप से व्यवहार्य बन सकेंगे।

इससे पहले उद्योग एवं वाणिज्य आयुक्त सचिव विक्रमजीत सिंह ने बताया कि इस क्षेत्र ने निर्यात में मजबूत वृद्धि दर्ज की है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान हस्तशिल्प निर्यात 817.39 करोड़ तक पहुंच गया है और आगामी वित्त वर्ष की पहली तिमाही में पहले ही 73.85 करोड़ का निर्यात दर्ज किया जा चुका है।

उन्होंने आगे बताया कि इस क्षेत्र के संस्थागत आधार में काफी विस्तार हुआ है। जम्मू-कश्मीर में 4,61,381 कारीगर और बुनकर पंजीकृत हैं जिनमें से 13,264 नए कारीगर पंजीकृत हुए हैं जिनमें कश्मीर में 7,919 और जम्मू में 5,345 शामिल हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / राधा पंडिता