पूर्व डीडीसी और पार्षदों के प्रवेश प्रतिबंध को बताया लोकतंत्र पर हमला, एलजी और मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

 


जम्मू, 21 अप्रैल (हि.स.)। सुचेतगढ़ के पूर्व डीडीसी तरनजीत सिंह टोनी ने जम्मू सिविल सचिवालय में पूर्व डीडीसी और पूर्व पार्षदों के प्रवेश पर कथित रोक को लेकर प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे “लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व पर सीधा हमला” करार दिया। टोनी ने कहा कि इस फैसले से जमीनी स्तर के उन जनप्रतिनिधियों के लिए शासन के दरवाजे बंद कर दिए गए हैं जिन्हें जनता ने चुना था। उन्होंने कहा कि अगर इन प्रतिनिधियों को ही सचिवालय में प्रवेश नहीं मिलेगा तो आम लोगों की आवाज सरकार तक कैसे पहुंचेगी।

उन्होंने सवाल उठाया कि विकास, जनकल्याण और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे प्रशासन तक पहुंचाने का माध्यम ही खत्म किया जा रहा है। टोनी ने कहा कि ये जनप्रतिनिधि जनता और सरकार के बीच पहला संपर्क बिंदु होते हैं लेकिन उन्हें ही रोकना सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करता है। प्रवेश में भेदभाव का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि जहां पूर्व विधायकों को आसानी से सचिवालय में प्रवेश दिया जा रहा है, वहीं पूर्व डीडीसी और पार्षदों को रोका जा रहा है। उन्होंने इसे प्रशासन के “दोहरे मापदंड” बताया।

टोनी ने इस कदम को “अनुचित, भेदभावपूर्ण और जनविरोधी” बताते हुए कहा कि इससे लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जवाबदेही से बचने और सत्ता को केंद्रीकृत करने का प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से सीधे जवाब मांगते हुए उन्होंने कहा कि क्या यही सुशासन का मॉडल है जिसमें चुने हुए प्रतिनिधियों की आवाज को दबाया जा रहा है। साथ ही उन्होंने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से भी इस मुद्दे पर तुरंत संज्ञान लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि एलजी और मुख्यमंत्री दोनों को डीजीपी व संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश देकर इस “मनमाने और अनुचित आदेश” की समीक्षा करनी चाहिए।

टोनी ने मांग की कि इस फैसले को तुरंत वापस लिया जाए और पूर्व डीडीसी व पार्षदों को सचिवालय में पूर्ण रूप से प्रवेश की अनुमति दी जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे फैसलों से सरकार और जनता के बीच दूरी और बढ़ेगी।

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा