वेद मन्दिर योल में यज्ञानुष्ठान के 43वें दिन स्वामी राम स्वरूप जी का संदेश-यज्ञ और सत्य आचरण से ही मोक्ष संभव
कठुआ, 24 मई (हि.स.)। वेद मन्दिर योल में आयोजित 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 43वें दिन स्वामी राम स्वरूप जी योगाचार्य ने यजुर्वेद के मन्त्र 1/3 एवं 1/6 की विस्तृत व्याख्या करते हुए श्रद्धालुओं और जिज्ञासुओं को महत्वपूर्ण आध्यात्मिक उपदेश दिए।
उन्होंने बताया कि यज्ञ एक ऐसा पवित्र कर्म है जो सैकड़ों प्रकार से वातावरण और जीवन को शुद्ध करता है तथा सम्पूर्ण विश्व को धारण करने वाला है। यजुर्वेद मन्त्र के अनुसार इस यज्ञ को स्वयं परमेश्वर पवित्र करता है जो तीनों लोकों का रचयिता है। स्वामी जी ने आगे यजुर्वेद मन्त्र 1/6 का उल्लेख करते हुए समझाया कि मनुष्य को यज्ञ कर्म और पुरुषार्थ करने की आज्ञा स्वयं परमेश्वर देता है। उन्होंने कहा कि परमेश्वर मनुष्य को सत्य व्रत का पालन करने और श्रेष्ठ कर्म करने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईश्वर की आज्ञा का पालन करने से ही मनुष्य को सुख, शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अतिरिक्त मोक्ष प्राप्ति का कोई अन्य मार्ग नहीं है।
वर्तमान समय में वेदों की शिक्षा ग्रहण करना, सत्य मार्ग पर चलना और विद्वानों के मार्गदर्शन में जीवन जीना अत्यंत आवश्यक है। स्वामी राम स्वरूप जी ने कहा कि वेद ही परमेश्वर की सच्ची वाणी हैं जो मनुष्य को श्रेष्ठ जीवन जीने और मोक्ष प्राप्त करने का मार्ग दिखाती हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया