सुध महादेव को राष्ट्रीय तीर्थस्थल के मानचित्र पर प्रमुख स्थान मिले: श्री राम सेना
जम्मू,, 26 अक्टूबर (हि.स.)।
श्री राम सेना जम्मू-कश्मीर यूटी के अध्यक्ष राजीव महाजन ने केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन से उधमपुर जिले के ऐतिहासिक सुध महादेव मंदिर को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में विकसित करने तथा इसके प्रचार-प्रसार और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए समयबद्ध योजना तैयार करने की मांग की है।
महाजन ने सवाल उठाया कि भगवान शिव के इस श्रद्धेय मंदिर को वह राष्ट्रीय पहचान, पर्यटन प्रोत्साहन और आधारभूत सुविधाएं क्यों नहीं मिल पाई हैं जिनका यह धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत की दृष्टि से हकदार है। उन्होंने जम्मू क्षेत्र के भाजपा विधायकों से भी आग्रह किया कि वे इस मुद्दे को संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाएं और केवल आश्वासनों तक सीमित रहने के बजाय ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रयास करें।
उधमपुर जिले की चेनानी तहसील के निकट स्थित सुध महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन एवं श्रद्धेय धार्मिक स्थल है। उधमपुर जिला प्रशासन की वेबसाइट पर उपलब्ध विवरण के अनुसार मंदिर में एक शिवलिंग है जिसे लगभग 3,000 वर्ष पुराना माना जाता है। यहां भगवान शिव और माता पार्वती की काले संगमरमर की प्रतिमा तथा भगवान शिव से जुड़ा एक पवित्र त्रिशूल भी स्थित है। निकटवर्ती गौरी कुंड और मंतलाई भी भगवान शिव एवं माता पार्वती से जुड़ी स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के कारण विशेष महत्व रखते हैं।
महाजन ने कहा कि सुध महादेव केवल एक स्थानीय धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह डुग्गर क्षेत्र की प्राचीन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। इसे देश के राष्ट्रीय तीर्थस्थलों के मानचित्र पर उचित स्थान मिलना चाहिए। जम्मू के हितों और धार्मिक विरासत की रक्षा की बात करने वाले जनप्रतिनिधियों को इन ऐतिहासिक मंदिरों के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए मिलकर ठोस कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने मंदिर में उपलब्ध सुविधाओं का व्यापक आकलन करने और अधूरे विकास कार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि मंदिर तक पहुंचने वाली सड़कों, पार्किंग, स्वच्छ पेयजल, साफ-सुथरे सार्वजनिक शौचालयों, ठहरने की व्यवस्था, विश्राम स्थलों, चिकित्सा सहायता, सार्वजनिक परिवहन और प्रमुख धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
महाजन ने वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों के लिए भी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के दौरान मंदिर की धार्मिक पवित्रता, ऐतिहासिक पहचान और आसपास के प्राकृतिक पर्यावरण का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। जहां आवश्यक हो वहां संरक्षण विशेषज्ञों की सहायता ली जानी चाहिए।
महाजन ने कहा कि सुध महादेव का विकास अलग-थलग तरीके से करने के बजाय गौरी कुंड, मंतलाई और व्यापक चेनानी–पटनीटॉप क्षेत्र को जोड़कर एक एकीकृत तीर्थ एवं पर्यटन सर्किट विकसित किया जाना चाहिए। स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गौरी कुंड माता पार्वती द्वारा भगवान शिव की आराधना से जुड़ा है जबकि मंतलाई को पारंपरिक रूप से भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह से संबंधित स्थल माना जाता है।
उन्होंने इस क्षेत्र के लिए एक व्यापक विकास योजना तैयार करने की मांग की जिसमें सड़क संपर्क, स्वच्छता, आवास, विरासत संरक्षण, श्रद्धालुओं की सुविधाएं और संयुक्त पर्यटन प्रचार शामिल हों। उन्होंने ऑनलाइन जानकारी, धार्मिक आयोजनों के कैलेंडर, डिजिटल प्रचार और धार्मिक संगठनों, टूर ऑपरेटरों तथा पर्यटन संस्थाओं के साथ समन्वय बढ़ाने की भी वकालत की ताकि देश के विभिन्न राज्यों से अधिक श्रद्धालु यहां पहुंच सकें।
केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने वर्ष 2016-17 में स्वदेश दर्शन योजना के तहत मंतलाई और सुध महादेव में पर्यटक सुविधाओं के विकास के लिए एक परियोजना को मंजूरी दी थी। पर्यटन मंत्रालय ने फरवरी 2026 में जारी एक विज्ञप्ति में बताया था कि 2016-17 के दौरान हिमालयन सर्किट के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर के लिए स्वीकृत सभी छह पर्यटन परियोजनाओं का भौतिक कार्य पूरा हो चुका है।
इस संदर्भ में महाजन ने प्रशासन से एक अद्यतन सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करने की मांग की जिसमें पूर्ण किए गए कार्यों, वर्तमान में उपलब्ध सुविधाओं, उनके रखरखाव और शेष आवश्यकताओं का स्पष्ट विवरण हो। उन्होंने कहा कि यह भी आकलन किया जाना चाहिए कि मौजूदा सुविधाओं से श्रद्धालुओं को कितना लाभ मिल रहा है और पर्यटन विकास की उपयुक्त योजनाओं के तहत आगे किस प्रकार की सहायता प्राप्त की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि किसी परियोजना का भौतिक कार्य पूरा होना तभी सार्थक है जब उसका लाभ श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाओं के रूप में मिले। प्रशासन को मौजूदा ढांचे का उचित रखरखाव सुनिश्चित करना चाहिए, कमियों की पहचान करनी चाहिए और उपलब्ध सुविधाओं को श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह उपयोगी बनाना चाहिए।
महाजन ने कहा कि सुध महादेव और आसपास के धार्मिक स्थलों के योजनाबद्ध विकास से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे परिवहन संचालकों, दुकानदारों, होटल व्यवसायियों, गाइडों, कारीगरों और छोटे व्यापारियों को लाभ मिल सकता है। उन्होंने विकास योजना बनाने और लागू करने में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। साथ ही, कचरा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और यातायात नियंत्रण को जिम्मेदार पर्यटन का अनिवार्य हिस्सा बताया।
अपने बयान के अंत में महाजन ने जम्मू के निर्वाचित प्रतिनिधियों, केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन से सुध महादेव तथा इससे जुड़े अन्य धार्मिक स्थलों के विकास के लिए एक समन्वित, पारदर्शी और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने की अपील की।
महाजन ने कहा कि जम्मू की जनता को अपनी प्राचीन धार्मिक विरासत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर प्रयासों की अपेक्षा है। सुध महादेव को उसकी धार्मिक महत्ता के अनुरूप राष्ट्रीय पहचान, बेहतर सुविधाएं और सुगम संपर्क मिलना चाहिए। गौरी कुंड और मंतलाई को भी एकीकृत तीर्थ सर्किट के रूप में विकसित किया जाना चाहिए ताकि विरासत का संरक्षण हो, श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलें और स्थानीय आबादी को आर्थिक लाभ प्राप्त हो सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / अश्वनी गुप्ता