जीएमसी कठुआ में पहली बार 5 साल के बच्चे की सफल किडनी बायोप्सी, चिकित्सा क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि

 


कठुआ, 11 जुलाई (हि.स.)। जीएमसी कठुआ ने उन्नत बाल चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार एक 5 वर्षीय बच्चे पर सफलतापूर्वक रीनल (किडनी) बायोप्सी कर इतिहास रच दिया है।

यह जटिल प्रक्रिया संस्थान के प्रिंसिपल डॉ. सुरिंदर कुमार अत्री के दूरदर्शी नेतृत्व, मार्गदर्शन और निरंतर प्रोत्साहन तथा बाल रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. विरेंद्र कुमार की देखरेख में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

रीनल बायोप्सी की इस चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया को बाल नेफ्रोलॉजिस्ट एवं असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आकाश कुमार ने डॉ. निपुण, डॉ. शारदा और डॉ. एराम की समर्पित टीम के सहयोग से अंजाम दिया। संबंधित बच्चा एक जटिल किडनी रोग से पीड़ित था जिसके सटीक उपचार के लिए ऊतक (टिश्यू) जांच आवश्यक थी।

प्रिंसिपल डॉ. सुरिंदर कुमार अत्री ने बताया कि कम उम्र के मरीज में इस प्रकार की प्रक्रिया तकनीकी रूप से अत्यंत चुनौतीपूर्ण होती है जिसके लिए सूक्ष्म योजना, उच्च स्तरीय सटीकता, अल्ट्रासाउंड मार्गदर्शन तथा प्रक्रिया के बाद गहन निगरानी की आवश्यकता होती है। टीम ने इन सभी पहलुओं का सफलतापूर्वक पालन करते हुए प्रक्रिया को सुरक्षित तरीके से पूरा किया।

यह उपलब्धि जीएमसी कठुआ में बाल नेफ्रोलॉजी सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम है जिससे अब बच्चों को ऐसे विशेष जांच के लिए बड़े अस्पतालों में रेफर करने की आवश्यकता काफी हद तक कम हो जाएगी। इस सफलता में बाल रोग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुदेश सिंह का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा जिनके मार्गदर्शन ने विभाग में उन्नत चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। यह उपलब्धि जीएमसी कठुआ की बढ़ती चिकित्सा क्षमता, टीम वर्क, क्लिनिकल उत्कृष्टता और क्षेत्र में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत उदाहरण प्रस्तुत करती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया