श्रीनगर पुलिस ने 2020 के हत्या मामले में दोषसिद्धि हासिल की, अदालत ने आजीवन कारावास की सुनाई सजा
श्रीनगर, 07 अगस्त (हि.स.)। 2020 के हत्या मामले मे माननीय न्यायालय ने गुलाम मोहिउद्दीन डार पुत्र अब्दुल गनी डार निवासी बिछवारा डलगेट, श्रीनगर को अब्दुल गनी डार पुत्र मोहम्मद अब्दुल्ला निवासी रस्सू, बडगाम की हत्या के लिए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 के तहत दोषी पाया। सजा पर बहस सुनने के बाद माननीय न्यायालय ने पाया कि यद्यपि अपराध गंभीर और जघन्य था फिर भी यह उन दुर्लभतम मामलों की श्रेणी में नहीं आता जिनमें मृत्युदंड दिया जा सकता है। तदनुसार न्यायालय ने दोषी को आजीवन कठोर कारावास और 50,000 के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माने की राशि यदि वसूल की जाती है तो मृतक के कानूनी वारिसों को मुआवजे के रूप में दी जाएगी। कानून के अनुसार दोषी को न्यायिक हिरासत में बिताए गए समय के लिए भी छूट दी गई है।
सजा सुनाते समय माननीय न्यायालय ने इस तथ्य पर गंभीरता से ध्यान दिया कि यह क्रूर हमला मस्जिद परिसर के अंदर हुआ था और यह देखा कि पूजा स्थल पर हिंसा सार्वजनिक शांति, सांप्रदायिक सद्भाव और पवित्र संस्थानों की पवित्रता को ठेस पहुंचाती है। पीड़ित के परिवार विशेषकर उसके बच्चों की निर्भरता को ध्यान में रखते हुए माननीय न्यायालय ने जम्मू और कश्मीर पीड़ित मुआवजा योजना, 2019 के तहत 7 लाख पीड़ित मुआवजे के भुगतान का भी निर्देश दिया जिसे जम्मू और कश्मीर राज्य विधि सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निर्धारित अवधि के भीतर जारी किया जाना है।
यह दोषसिद्धि श्रीनगर पुलिस द्वारा की गई गहन जांच और माननीय न्यायालय के समक्ष प्रभावी अभियोजन का परिणाम है। यह पेशेवर जांच, वैज्ञानिक साक्ष्य और परिश्रमी अभियोजन के माध्यम से पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए श्रीनगर पुलिस की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता