सोशल मीडिया-वरदान भी, चुनौती भी (लेखिका-पूनम झा)

 


कठुआ, 19 जून (हि.स.)। आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। यह हमारी दिनचर्या में इस प्रकार शामिल हो गया है कि इसके बिना जीवन अधूरा-सा प्रतीत होता है। जानकारी प्राप्त करने से लेकर मनोरंजन, शिक्षा, रोजगार और संचार तक हर क्षेत्र में सोशल मीडिया ने हमारी पहुंच को आसान और तेज बना दिया है।

आज किसी भी विषय से जुड़ी जानकारी हमें कुछ ही सेकंड में मिल जाती है। चाहे किसी स्थान का मार्ग जानना हो, इतिहास समझना हो या स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्राप्त करनी हो सोशल मीडिया और इंटरनेट हमारी हर जिज्ञासा का समाधान प्रस्तुत करते हैं। यही कारण है कि यह आधुनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण साधन बन चुका है लेकिन सोशल मीडिया की यही शक्ति उसकी सबसे बड़ी कमजोरी भी बनती जा रही है। जब यह प्लेटफॉर्म बनाए गए थे तब शायद यह अनुमान नहीं लगाया गया था कि इसका उपयोग हर प्रकार के लोग करेंगे। परिणामस्वरूप यहां किसी भी प्रकार की जानकारी साझा करने की स्वतंत्रता मिल गई जिसका दुरुपयोग भी होने लगा। आज सोशल मीडिया पर सही और उपयोगी जानकारी के साथ-साथ झूठी और भ्रामक सूचनाएं भी तेजी से फैल रही हैं। कई लोग बिना किसी प्रमाण के ऐसे दावे करते हैं जो लोगों की भावनाओं और विश्वास का फायदा उठाते हैं जैसे चमत्कारी उपायों से धन प्राप्ति, टोटकों से समस्याओं का समाधान या घरेलू नुस्खों से तुरंत परिणाम मिलने के दावे।

समस्या तब और गंभीर हो जाती है जब हर व्यक्ति सही और गलत में अंतर करने में सक्षम नहीं होता। बच्चे युवा और बुजुर्ग सभी सोशल मीडिया के प्रभाव में आते हैं और बार-बार देखी गई बातें उनके मन में सत्य के रूप में स्थापित हो जाती हैं। इससे समाज में भ्रम और अंधविश्वास बढ़ने लगता है। हालांकि यह भी सच है कि सोशल मीडिया के कई सकारात्मक पहलू हैं। यह हमें शिक्षित करता है, जागरूक बनाता है और दुनिया भर की घटनाओं से जोड़ता है। सामाजिक मुद्दों पर चर्चा और जागरूकता फैलाने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए आवश्यक है कि सोशल मीडिया के उपयोग में संतुलन और समझदारी बरती जाए। सरकार सोशल मीडिया कंपनियों और समाज तीनों की जिम्मेदारी है कि वे भ्रामक और गलत जानकारी पर नियंत्रण रखें। साथ ही प्रत्येक व्यक्ति को भी जागरूक बनना होगा और किसी भी जानकारी को सत्य मानने से पहले उसकी पुष्टि करनी होगी।

अंततः सोशल मीडिया एक शक्तिशाली साधन है यदि इसका सही उपयोग किया जाए तो यह ज्ञान और विकास का माध्यम बन सकता है लेकिन यदि इसका दुरुपयोग हो तो यह समाज के लिए खतरा भी साबित हो सकता है। इसलिए हमें इसका उपयोग सोच-समझकर करना चाहिए ताकि हम इसके लाभ उठा सकें और इसके दुष्प्रभावों से बच सकें।

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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया