शेर-ए-कश्मीर आयुर्वेद विज्ञान संस्थान सौरा ने जम्मू और कश्मीर सेवा चयन बोर्ड और जम्मू कश्मीर लोक सेवा आयोग के माध्यम से लगभग 1,100 रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की
श्रीनगर, 20 मार्च (हि.स.)। मरीजों की बढ़ती संख्या और विशेष चिकित्सा सेवाओं में देरी को कम करने के लिए शेर-ए-कश्मीर आयुर्वेद विज्ञान संस्थान सौरा ने जम्मू और कश्मीर सेवा चयन बोर्ड और जम्मू कश्मीर लोक सेवा आयोग के माध्यम से लगभग 1,100 रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों और उन्नत निदान सुविधाओं के उद्घाटन के अवसर पर आज मीडिया से बातचीत करते हुए शेर-ए-कश्मीर आयुर्वेद विज्ञान संस्थान सौरा के निदेशक डॉ. अशरफ गनी ने कहा कि यह भर्ती अभियान लगातार बनी हुई मानव संसाधन की कमी को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण है जिसके कारण परामर्श और सर्जरी के लिए प्रतीक्षा समय बढ़ गया है विशेष रूप से सुपर-स्पेशियलिटी विभागों में।
उन्होंने कहा कि हमने भर्ती एजेंसियों को भेजने के लिए लगभग 1,100 पद आरक्षित किए हैं। एक बार ये पद भर जाने के बाद संस्थान मरीजों की बढ़ती संख्या को बेहतर ढंग से संभालने में सक्षम होगा।
हालांकि डॉ. गनी ने कहा कि एसकेआईएमएस में प्रतीक्षा अवधि जम्मू-कश्मीर के बाहर के प्रमुख संस्थानों की तुलना में अभी भी अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने कहा कि कई प्रमुख अस्पतालों में प्रतीक्षा अवधि महीनों तक बढ़ सकती है। एसकेआईएमएस में, सुपर-स्पेशियलिटी विभागों में यह आमतौर पर छह से बारह सप्ताह के भीतर होती है। देरी को कम करने के लिए संस्थान भर्ती के साथ-साथ परिचालन संबंधी बदलावों की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा कि पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध होने के बाद हम आउट पेशेंट विभागों और ऑपरेशन थिएटरों में डबल शिफ्ट शुरू करने का इरादा रखते हैं। इससे प्रतीक्षा समय में काफी कमी आएगी।
अधिकारियों ने बताया कि सामान्य चिकित्सा और सामान्य सर्जरी विभाग प्रतिदिन मरीजों की देखभाल कर रहे हैं लेकिन भारी मांग के कारण सुपर-स्पेशियलिटी सेवाएं दबाव में हैं। कर्मचारी व्यवस्था के साथ-साथ एसकेआईएमएस ने पिछले दो वर्षों में अपने चिकित्सा बुनियादी ढांचे का व्यापक नवीनीकरण किया है। डॉ. गनी ने बताया कि पुराने और बेकार हो चुके उपकरणों को बदल दिया गया है और गहन चिकित्सा सुविधाओं में मौजूद कमियों को काफी हद तक दूर कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि हमने पाया कि कई आवश्यक मशीनें वर्षों से खरीदी ही नहीं गई थीं। पिछले दो वर्षों में हमने सुविधाओं को उन्नत करने के लिए पूरे बजट का उपयोग किया है और केंद्रीय एजेंसियों से भी सहायता ली है। प्रमुख उपकरणों में कैंसर के इलाज के लिए लगभग 39 करोड़ रुपये की लागत से खरीदा गया एक अत्याधुनिक लीनियर एक्सीलरेटर शामिल है जिसे अगले कुछ महीनों में स्थापित किए जाने की उम्मीद है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता