जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन पर जीडीसी कठुआ में मंथन, प्रो. रविंदर रामपाल की स्मृति में आयोजित संगोष्ठी
कठुआ, 12 अक्टूबर (हि.स.)। सरकारी डिग्री कॉलेज कठुआ में दिवंगत प्रो. रविंदर रामपाल की स्मृति में जलवायु परिवर्तन और आपदा चुनौतियां विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। कॉलेज की साहित्यिक समिति ने डॉ. डीके रामपाल ट्रस्ट के सहयोग से कार्यक्रम का आयोजन किया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति जागरूक करने के साथ आपदा प्रबंधन, बचाव की तैयारी और सतत विकास के महत्व से अवगत कराना था।
जम्मू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. आरडी शर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शिरकत की। जीडीसी कठुआ के प्राचार्य डॉ. मनोहर लाल ने अतिथियों, शिक्षाविदों, निर्णायक मंडल के सदस्यों, प्राध्यापकों और प्रतिभागी विद्यार्थियों का स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि ऐसे शैक्षणिक आयोजन विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता, वैज्ञानिक सोच और जिम्मेदार नागरिकता की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में पूर्व वार्ड सदस्य एवं समाजसेवी राहुल देव विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में शामिल हुए जबकि महिला कॉलेज कठुआ के प्राचार्य प्रो. जय पाल सिंह और जीडीसी बसोहली के प्राचार्य प्रो. राज किरण विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। डॉ. डीके रामपाल ट्रस्ट के ट्रस्टी विनय रामपाल ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
संगोष्ठी में विभिन्न कॉलेजों के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने जलवायु परिवर्तन के कारणों और प्रभावों, आपदा प्रबंधन, सामुदायिक स्तर पर तैयारियों तथा पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रस्तुतियों में आपदा के जोखिम को कम करने के लिए टिकाऊ जीवनशैली अपनाने, समय रहते तैयारी करने और सही जानकारी के आधार पर निर्णय लेने पर जोर दिया गया। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में पूर्व प्राचार्य प्रो. एमएस पठानिया, पूर्व प्राचार्य प्रो. अनिरुद्ध शर्मा और अंग्रेजी विभाग के सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष प्रो. सरूप चंदर शामिल रहे। प्रतिभागियों का मूल्यांकन विषयवस्तु, प्रस्तुति की स्पष्टता, प्रासंगिकता और समग्र प्रदर्शन के आधार पर किया गया।
प्रतियोगिता में जीडीसी कठुआ की अनामिका ने प्रथम, जीडीसी मढ़हीन के अक्षय कुमार ने द्वितीय और जीडीसी सांबा के दानिश भगत ने तृतीय स्थान हासिल किया। इसके अलावा हरलीन कौर, तानिया राजपूत, सानिया बिलोवरिया, पल्लवी चौधरी पलक डब्ब और सादिया नाज को भी उनकी भागीदारी और उपलब्धियों के लिए नकद पुरस्कार प्रदान किए गए।
इस अवसर पर प्रो. विनय रामपाल ने संगोष्ठी के आयोजन के लिए कॉलेज के प्राध्यापकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को बौद्धिक चर्चा और पर्यावरण संबंधी विषयों पर अपने विचार रखने के लिए मंच उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।
मुख्य अतिथि प्रो. आरडी शर्मा ने जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ी बढ़ती चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए जागरूकता, पूर्व तैयारी और सामूहिक जिम्मेदारी की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए समाज के सभी वर्गों की भागीदारी जरूरी है, ताकि एक सुरक्षित, आपदा-सहिष्णु और टिकाऊ भविष्य का निर्माण किया जा सके। कार्यक्रम में साहित्यिक समिति के संयोजक डॉ. नीरज शर्मा, प्रो. संदीप चौधरी, डॉ. ईवा शर्मा, डॉ. निताशा बलोरिया, डॉ. कमलजोत कौर, प्रो. सुप्रीत कौर, विभिन्न विभागों के अध्यक्ष तथा अन्य शिक्षण संस्थानों के प्राध्यापक उपस्थित रहे।
अंत में उर्दू विभाग के अध्यक्ष एवं स्टाफ सचिव डॉ. यश पाल शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए मुख्य अतिथि, विशेष आमंत्रित अतिथि, अन्य अतिथियों, निर्णायक मंडल, ट्रस्ट के प्रतिनिधि, प्रतिभागियों और प्राध्यापकों का आभार व्यक्त किया। संगोष्ठी के माध्यम से दिवंगत प्रो. रविंदर रामपाल को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन और सतत विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया