ग्रामीण विकास विभाग के सचिव ने प्रमुख ग्रामीण विकास योजनाओं की समीक्षा की

 

श्रीनगर, 15 अक्टूबर (हि.स.)।

ग्रामीण विकास विभाग और पंचायती राज के सचिव रमेश कुमार ने मंगलवार को जम्मू और कश्मीर में विभाग द्वारा कार्यान्वित की जा रही योजनाओं और कार्यक्रमों की व्यापक समीक्षा की।

समीक्षा का मुख्य उद्देश्य भौतिक प्रगति, वित्तीय अनुशासन, निधियों का समयबद्ध उपयोग और ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा वितरण को सुदृढ़ करना था।

सचिव ने विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) , प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण, स्वच्छ भारत मिशन – ग्रामीण, जम्मू और कश्मीर ग्रामीण आजीविका मिशन , राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान , हिमायत और एकीकृत जलसंभर प्रबंधन कार्यक्रम सहित प्रमुख कार्यक्रमों के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की।

वीबी-ग्राम-जी की समीक्षा करते हुए सचिव ने कार्यक्रम के तहत रोजगार सृजन, कार्यों के कार्यान्वयन और वित्तीय प्रगति का आकलन किया। उन्हें बताया गया कि 3.21 लाख व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त हुआ है जिससे 59.19 लाख व्यक्ति-दिवस का सृजन हुआ है।

सचिव ने वित्तीय अनुशासन, मजदूरी और सामग्री भुगतान की समयबद्ध प्रक्रिया, कार्यों की प्रभावी निगरानी और जिला एवं ब्लॉक स्तर के अधिकारियों के बीच समन्वय पर जोर दिया ताकि कार्यान्वयन समय पर हो और निधियों का कुशलतापूर्वक उपयोग हो सके।

उन्होंने पाया कि यद्यपि योजना प्रक्रिया डिजिटल है फिर भी अंतिम रूप देने के चरण में अक्सर त्रुटियां और विसंगतियां सामने आती हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा का पालन करने, प्रविष्टियों की सावधानीपूर्वक समीक्षा करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि ग्राम पंचायत स्तर के पदाधिकारी अनुमत कार्यों की सूची से पूरी तरह परिचित हों।

सचिव ने इस बात पर भी जोर दिया कि ग्राम योजनाओं में स्थानीय आवश्यकताओं, भौगोलिक परिस्थितियों और प्रत्येक क्षेत्र की विशिष्ट कमजोरियों को प्रतिबिंबित किया जाना चाहिए। उन्होंने संवेदनशील और आपदा-प्रवण क्षेत्रों में जल संरक्षण, जल निकासी, सुरक्षा संरचनाओं और कनेक्टिविटी सहित जमीनी आवश्यकताओं के अनुसार कार्यों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

पीएमएवाई-जी की समीक्षा करते हुए सचिव ने एसईसीसी और आवास प्लस श्रेणियों के तहत ग्रामीण आवास की प्रगति का आकलन किया।

आंकड़ों के अनुसार स्वीकृत 3,34,586 घरों के मुकाबले 3,27,210 घर पूरे हो चुके हैं

जिससे कुल पूर्णता दर लगभग 98 प्रतिशत हो गई है।

सचिव ने नियमित जिला स्तरीय निगरानी, लाभार्थियों के साथ निरंतर संपर्क और कार्यान्वयन में आने वाली बाधाओं के शीघ्र समाधान के माध्यम से लंबित घरों के निर्माण में तेजी लाने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने लाभार्थी अभिलेखों के उचित सत्यापन, उपलब्ध निधियों की समयबद्ध निकासी और उपयोग और अन्य योजनाओं के साथ प्रभावी समन्वय पर भी जोर दिया ताकि पात्र ग्रामीण परिवारों को बिना किसी अनावश्यक देरी के इच्छित आवास लाभ प्राप्त हो सकें।

एसबीएम-जी चरण II की समीक्षा करते हुए कुमार ने जम्मू और कश्मीर में दीर्घकालिक स्वच्छता परिणामों को सुनिश्चित करने के लिए सतत व्यवहार परिवर्तन के महत्व पर बल दिया और इस बात पर बल दिया कि ध्यान बुनियादी ढांचे के निर्माण से आगे बढ़कर लोगों में स्वच्छता, साफ-सफाई और स्वच्छता के प्रति स्थायी जिम्मेदारी और स्वामित्व की भावना को बढ़ावा देने पर केंद्रित होना चाहिए।

एनआरएलएम के अंतर्गत जम्मू और कश्मीर ग्रामीण आजीविका मिशन की समीक्षा करते हुए सचिव ने महिला स्वयं सहायता समूहों, संस्था निर्माण, वित्तीय समावेशन, कृषि और गैर-कृषि आजीविका और लखपति दीदी कार्यक्रम से संबंधित पहलों का जायजा लिया। समीक्षा में सामुदायिक-प्रबंधित प्रशिक्षण केंद्र, क्षमता निर्माण गतिविधियाँ और ग्रामीण परिवारों के लिए आजीविका और उद्यम के अवसरों का विस्तार करने के लिए मिशन युवा के साथ ग्रामीण आजीविका मिशन का एकीकरण भी शामिल था।

दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना के अंतर्गत हिमायत परियोजना की समीक्षा करते हुए सचिव ने बेरोजगार युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार-उन्मुख प्रशिक्षण की प्रगति का आकलन किया। विभागीय प्रस्तुति में बताया गया कि 2025-26 के पायलट चरण के तहत 2,248 उम्मीदवारों के प्रशिक्षण लक्ष्य के मुकाबले 2,032 उम्मीदवारों ने प्रशिक्षण पूरा कर लिया है और 1,378 को नियुक्त किया जा चुका है। 2025-28 की कार्य योजना के तहत ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 32,480 उम्मीदवारों का लक्ष्य स्वीकृत किया है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के जलसंभर विकास घटक के अंतर्गत एकीकृत जलसंभर प्रबंधन कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए सचिव ने जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधार, सतत कृषि और जलवायु अनुकूलन में हुई प्रगति का आकलन किया। उन्हें बताया गया कि 69,493 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करने वाली 19 परियोजनाओं को कुल 194.58 करोड़ की परियोजना लागत पर स्वीकृत किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा जारी 155.47 करोड़ रुपये की धनराशि के मुकाबले कुल व्यय 137.65 करोड़ रुपये रहा। 2026-27 के लिए 32.47 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे जिनमें से 16.07 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

सचिव ने संबंधित अधिकारियों को लंबित कार्यों में तेजी लाने और कार्यान्वयन की समग्र गति में सुधार करने का निर्देश दिया। उन्होंने पाया कि कुछ क्षेत्रों में प्रगति अपेक्षा से कम है और इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक अधिकारी को अपने निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने की व्यक्तिगत जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

जवाबदेही के महत्व को दोहराते हुए सचिव ने कहा कि विलंब, खराब प्रदर्शन और निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने में विफलता के लिए हर स्तर पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। जिला और ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन उनकी जिम्मेदारियों और जमीनी स्तर पर प्राप्त परिणामों के आधार पर किया जाएगा।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता