स्थायी करने की मांग पर अड़े अस्थायी सफाई कर्मचारी, कूड़े के ढेर में तब्दील कठुआ शहर, सरकार-प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

 


कठुआ 01 सितंबर (हि.स.)। नगर परिषद कठुआ के अस्थायी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल मंगलवार को लगातार 15वें दिन भी जारी रही। सफाई कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उन्हें स्थायी करने को लेकर सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता तब तक वे हड़ताल समाप्त नहीं करेंगे। कर्मचारियों के आंदोलन के लंबा खिंचने के साथ ही अब कठुआ शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और शहर के कई हिस्से कूड़े के ढेर में तब्दील हो चुके हैं।

कठुआ शहर के मुख्य मार्गों, चैक-चैराहों और बाजार क्षेत्रों में जगह-जगह कचरा और प्लास्टिक के लिफाफों के ढेर लगे हुए हैं। कालीबाड़ी से लेकर मुखर्जी चैक और हटली मोड़ तक कई स्थानों पर सड़कों के किनारे जमा कचरा अब सड़क तक फैल रहा है। लगातार हो रही बारिश ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। बारिश के पानी के साथ कचरा सड़कों पर फैलने के साथ-साथ नालियों में जा रहा है जिससे कई जगह नालियां जाम होने की समस्या भी सामने आ रही है। कचरे के ढेरों से उठ रही दुर्गंध के कारण राहगीरों, दुकानदारों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर हालात ऐसे बन गए हैं कि लोगों को कचरे के ढेर के पास से गुजरना तक मुश्किल हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गंदगी अब उनके घरों और दुकानों तक पहुंच रही है। बारिश के कारण सड़कों पर फैला कचरा शहर की स्थिति को और बदहाल बना रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि 15 दिनों से सफाई व्यवस्था ठप होने के बावजूद जिला प्रशासन और नगर परिषद की ओर से वैकल्पिक सफाई व्यवस्था क्यों नहीं की गई? यदि कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं तो प्रशासन को शहर की सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी लेकिन अभी तक ऐसा कोई प्रभावी कदम जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर बैठकें और चर्चाएं तो हो रही हैं लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस समाधान नजर नहीं आ रहा। शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर बढ़ते जा रहे हैं और आम जनता इसका खामियाजा भुगत रही है। लोगों का कहना है कि सफाई व्यवस्था जैसी बुनियादी जरूरत को लेकर प्रशासन की यह निष्क्रियता गंभीर चिंता का विषय है। सफाई कर्मचारियों का कहना है कि वे इस बार आर-पार की लड़ाई लड़ रहे हैं और स्थायी किए जाने का ठोस निर्णय होने तक हड़ताल जारी रखेंगे। ऐसे में अब सरकार और जिला प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है, एक ओर कर्मचारियों की जायज मांग पर निर्णय लेना और दूसरी ओर शहर की सफाई व्यवस्था को तत्काल पटरी पर लाना।

शहरवासियों का कहना है कि यदि हालात इसी तरह बने रहे तो आने वाले दिनों में गंदगी और दुर्गंध की समस्या और गंभीर हो सकती है। लोगों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि सफाई कर्मचारियों की समस्या का जल्द समाधान किया जाए और जब तक हड़ताल समाप्त नहीं होती तब तक वैकल्पिक सफाई व्यवस्था सुनिश्चित कर शहरवासियों को गंदगी के बीच रहने से राहत दिलाई जाए। शहरवासियों का सीधा सवाल है कि जब कठुआ की सड़कों पर कचरा खुलेआम जमा है नालियां जाम हो रही हैं और लोग परेशान हैं, तो आखिर सरकार और प्रशासन की नजर इस गंभीर समस्या पर कब पड़ेगी?

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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया