सज्जाद लोन ने जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरियों के लिए ईडब्ल्यूएस के मानदंडों पर सवाल उठाए
श्रीनगर, 30 सितंबर (हि.स.)।पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और विधायक सज्जाद लोन ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरियों के लिए ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) के मानदंडों पर सवाल उठाते हुए राशन कार्ड की मौजूदा श्रेणियों के आधार पर गरीब व्यक्ति की एक समान परिभाषा की मांग की ।
विधानसभा में बोलते हुए लोन ने जम्मू-कश्मीर में एएवाई/बीपीएल और प्राथमिकता प्राप्त परिवारों के लाभार्थियों के बीच ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र जारी करने में कथित असमानता की ओर इशारा किया।
उन्होंने पूछा कि जब वही सरकार कहती है कि कश्मीर में 37 लाख गरीब लोग हैं और जम्मू में 29 लाख गरीब लोग हैं तो यह कैसे हो सकता है कि पिछले एक साल में जम्मू से केवल 24,000 ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र जारी हुए हैं जबकि कश्मीर से केवल 24,000।
लोन ने कहा कि समस्या संपत्ति के मानदंडों में है उनका तर्क था कि कोई व्यक्ति सब्सिडी वाला भोजन प्राप्त करने के लिए गरीब माना जा सकता है लेकिन सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करते समय ईडब्ल्यूएस लाभों के लिए अपात्र हो जाता है।
उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति राशन लेने जाता है, अपने बीपीएल या एएवाई कार्ड के लिए जाता है तो वह गरीब होता है। लेकिन जब वह नौकरी के लिए जाता है तो वह रातोंरात अमीर हो जाता है।
केरल का उदाहरण देते हुए लोन ने कहा कि एएवाई और बीपीएल/प्राथमिकता प्राप्त परिवार का दर्जा ईडब्ल्यूएस पात्रता के लिए मानदंड के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
उन्होंने जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरियों के लिए केंद्र द्वारा दी गई ईडब्ल्यूएस परिभाषा के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य की नौकरियों के लिए हम कानूनी रूप से उस परिभाषा का इस्तेमाल करने के लिए बाध्य नहीं हैं।
लोन ने कहा कि 40,000 भर्तियां लंबित हैं और उनका तर्क है कि ईडब्ल्यूएस मानदंड का चुनाव लाभार्थियों के क्षेत्रीय वितरण को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि सरकार को गरीब की एक समान परिभाषा रखनी चाहिए। एक गरीब व्यक्ति वह है जिसके पास प्राथमिकता प्राप्त परिवार राशन कार्ड और एएवाई राशन कार्ड हो।
उन्होंने आगे कहा कि रोजगार और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के लिए दो अलग-अलग परिभाषाएँ नहीं हो सकतीं।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता