सज्जाद लोन ने नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार पर किया तीखा हमला, कहा-भर्ती के मोर्चे पर चुनावी वादों और जमीनी हकीकत में भारी अंतर
श्रीनगर, 21 सितंबर (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और हंदवाडा विधायक सज्जाद लोन ने सोमवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार पर तीखा हमला बोला।
विधानसभा के आंकड़ों से पता चला है कि भर्ती के मोर्चे पर चुनावी वादों और जमीनी हकीकत में भारी अंतर है। विधानसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद बोलते हुए उन्होंने भर्ती के आंकड़ों पर तीखा सवाल उठाया। लोन ने कहा कि आंकड़ों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार द्वारा किए गए झूठे वादों की कड़वी सच्चाई उजागर कर दी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस का घोषणापत्र झूठ का पुलिंदा है। उन्होंने यह भी कहा कि वे सिर्फ काल्पनिक बातें नहीं कर रहे हैं बल्कि सरकार के अपने रिकॉर्ड से प्राप्त ठोस आंकड़ों से अपने हर शब्द का समर्थन कर रहे हैं। सबसे बड़ी विफलता बताते हुए लोन ने कहा कि राष्ट्रीय सम्मेलन के घोषणापत्र में जम्मू-कश्मीर के लोगों को एक लाख नई नौकरियां देने का वादा किया गया था। इस वादे के मुकाबले सरकार अब तक सिर्फ 899 नौकरियां ही पैदा कर पाई है।
आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए लोन ने करारा जवाब दिया। मौजूदा रफ्तार से तो उन्हें एक लाख नौकरियां पैदा करने में 222.46 साल लग जाएंगे। यह तो मजाक है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा मजाक तो उन लोगों पर है जिन्होंने इस झूठ पर विश्वास किया। दूसरा टूटा हुआ वादा सरकारी विभागों में रिक्त पदों से संबंधित है। एनसी ने अपने घोषणापत्र में सत्ता में आने के 180 दिनों के भीतर सभी रिक्त पदों को भरने का वादा किया था। विधानसभा के आंकड़े इससे बिलकुल अलग कहानी बयां करते हैं। पिछले दो वर्षों में केवल 7580 रिक्त पद भरे गए हैं जबकि 40672 पद अभी भी रिक्त हैं।
आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए लोन ने बताया कि 24427 गैर-राजपत्रित पद, 3318 राजपत्रित पद और 12927 बहु-कार्यकारी कर्मचारियों के पद अभी भी खाली हैं। उन्होंने कहा कि इस रफ्तार से इन 40672 पदों को भरने में एक दशक से अधिक समय लगेगा जिससे सत्ता पक्ष के पास जवाब देने का बहुत कम मौका बचा। तीसरा टूटा हुआ वादा सरकारी नौकरियों के आवेदन शुल्क से संबंधित है। उन्होंने कहा कि एनसी ने सार्वजनिक रूप से इन शुल्कों को माफ करने का वादा किया था ताकि वित्तीय बोझ नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए बाधा न बने।
लोन ने खुलासा किया कि उन्होंने ठीक इसी मुद्दे पर एक साल पहले विधानसभा में सवाल उठाया था और जो जवाब मिला वह बेहद निंदनीय था। उन्होंने कहा कि पता चला कि उसी सरकार ने आवेदन शुल्क के रूप में करोड़ों रुपये वसूले थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता