जम्मू-कश्मीर में धू-धू कर जले रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले
जम्मू,, 20 अक्टूबर (हि.स.)।
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक विजयदशमी का पर्व जम्मू-कश्मीर में पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के विशाल पुतलों का दहन किया गया। जम्मू के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में भी दशहरे का भव्य आयोजन हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोग रावण दहन देखने पहुंचे। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा, स्वामी दिनेश भारती और महंत रामेश्वर दास सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
दशहरे के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया। रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन कर भगवान श्रीराम की विजय का उत्सव मनाया गया। इस दौरान लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।
इस मौके पर डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने विजयदशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व हमें जीवन में सच्चाई, अच्छाई और आपसी भाईचारे के रास्ते पर चलने की सीख देता है। उन्होंने कहा कि रावण को भगवान राम ने नहीं, बल्कि उसके अपने अहंकार ने मारा था। रावण के पास अपार शक्ति और ज्ञान था, लेकिन उसका अहंकार ही उसके विनाश का कारण बना। इसलिए हर व्यक्ति को अपने भीतर के अहंकार और बुराइयों को समाप्त करने की जरूरत है।
डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने बच्चों को धर्म और अच्छे संस्कारों से जोड़ने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज जरूरत है कि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को धर्म की सही शिक्षा दें, ताकि वे प्रेम, सम्मान और आपसी भाईचारे के साथ रहना सीखें। उन्होंने कहा कि धर्म हमें एक-दूसरे से जोड़ने और मिल-जुलकर रहने का संदेश देता है।
उन्होंने समाज में आपसी सद्भाव और भाईचारा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि सभी लोगों को एक-दूसरे के धर्म और भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। विजयदशमी का असली संदेश तभी सार्थक होगा, जब लोग अपने भीतर की बुराइयों को दूर कर प्रेम और एकता के साथ आगे बढ़ेंगे।
परेड ग्राउंड में आयोजित दशहरा उत्सव के दौरान रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। इस आयोजन ने एक बार फिर बुराई पर अच्छाई की जीत और समाज में शांति, एकता तथा भाईचारे का संदेश दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / अश्वनी गुप्ता