विपक्ष के आरोपों पर राजीव जसरोटिया का पलटवार, बोले-निर्वाचन आयोग के खिलाफ सबूत पेश करे विपक्ष

 


कठुआ, 17 अक्टूबर (हि.स.)। जसरोटा के विधायक एवं वरिष्ठ भाजपा नेता राजीव जसरोटिया ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सीजेपी और विपक्षी दलों द्वारा किए जा रहे विरोध-प्रदर्शनों की आलोचना करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग पर चुनावी अनियमितताओं के आरोप लगाने से पहले विपक्ष को ठोस सबूत पेश करने चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध और असहमति का अधिकार सभी को है लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाने के लिए तथ्यों और प्रमाणों का होना आवश्यक है।

जसरोटिया ने कहा कि निर्वाचन आयोग भारतीय लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना उसकी प्रमुख जिम्मेदारी है। यदि चुनावी प्रक्रिया में कोई वास्तविक अनियमितता सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और शिकायतों का नियमानुसार समाधान किया जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक आरोपों और विरोध-प्रदर्शनों के आधार पर किसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर जारी विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए जसरोटिया ने कहा कि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के लिए मतदाता सूचियों का सही, अद्यतन और पारदर्शी होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से सूची से हट जाता है या सत्यापन प्रक्रिया के दौरान किसी नागरिक को परेशानी होती है तो उसकी शिकायत का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र मतदाता को लागू नियमों के तहत अपना नाम दर्ज करवाने और मतदाता सूची में त्रुटियों को ठीक करवाने का उचित अवसर मिलना चाहिए। साथ ही चुनावी अनियमितताओं से जुड़े गंभीर आरोपों की जांच ठोस और सत्यापन योग्य प्रमाणों के आधार पर की जानी चाहिए।

जसरोटिया ने कहा कि विपक्ष की जिम्मेदारी सरकार की नीतियों और फैसलों पर सवाल उठाने के साथ-साथ व्यवस्था में सुधार के लिए रचनात्मक सुझाव देना भी है। उन्होंने विपक्षी दलों से पूछा कि उनके विरोध-प्रदर्शनों से मतदाताओं की समस्याओं का समाधान किस प्रकार होगा और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए उनके पास क्या ठोस प्रस्ताव हैं। जसरोटिया ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा है और भाजपा भी लोकतांत्रिक असहमति के अधिकार का सम्मान करती है। हालांकि विरोध-प्रदर्शन संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने या निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं को दरकिनार करने का माध्यम नहीं बनने चाहिए।

जसरोटिया ने कहा कि भाजपा संविधान, कानून के शासन और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीजेपी और विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शनों के पीछे सरकार के खिलाफ राजनीतिक माहौल बनाने का प्रयास हो सकता है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी शिकायत का समाधान तथ्यों, निष्पक्ष जांच और स्थापित संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती केवल चुनाव कराने या सत्ता हासिल करने तक सीमित नहीं है बल्कि इसकी वास्तविक ताकत संविधान के प्रति सम्मान, संस्थागत जवाबदेही और नागरिकों के मताधिकार की सुरक्षा में निहित है। उन्होंने विपक्ष से अपने आरोपों को प्रमाणों के साथ सामने रखने और चुनावी व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस सुझाव देने का आग्रह किया। जसरोटिया ने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच मतभेद लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा हैं लेकिन उनका समाधान लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संवैधानिक प्रक्रियाओं के भीतर ही होना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया