जम्मू कश्मीर के आईटीआई को उद्योग अनुकूल कौशल केंद्रों में बदलने के लिए पीएम सेतु योजना : मुख्य सचिव दुल्लू

 


श्रीनगर, 10 सितंबर(हि.स.)। मुख्य सचिव अटल दुल्लू ने जम्मू-कश्मीर में प्रधानमंत्री कौशल विकास एवं रोजगार क्षमता परिवर्तन योजना (पीएम-सेतु) के कार्यान्वयन की समीक्षा और मार्गदर्शन के लिए पहली केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय संचालन समिति की बैठक की अध्यक्षता की।

उन्होंने उद्योग की आवश्यकताओं और उभरते रोजगार अवसरों के प्रति कौशल शिक्षा को अधिक संवेदनशील बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

बैठक में वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के अलावा, शिक्षा आयुक्त सचिव, कौशल विकास विभाग के सचिव, जम्मू-कश्मीर कौशल विकास मिशन के प्रबंध निदेशक, कौशल विकास विभाग के निदेशक, श्रम आयुक्त, औद्योगिक निकायों के प्रतिनिधि और अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य सचिव ने पीएम सेतु को कौशल शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए एक बहुत अच्छा मॉडल बताया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के उन्नयन में भौतिक अवसंरचना से परे जाकर मुख्य रूप से उद्योग अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए जो जम्मू-कश्मीर के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण और उच्च वेतन वाली नौकरियों में परिवर्तित होने वाले कौशल से लैस कर सके।

उन्होंने आगे इस बात पर जोर दिया कि इस पहल के लिए चयनित उद्योग भागीदारों को न केवल वित्तीय सहयोग बल्कि प्रौद्योगिकी, क्षेत्र विशेषज्ञता, आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियां, औद्योगिक प्रक्रियाओं का अनुभव और प्रशिक्षित युवाओं के लिए विश्वसनीय रोजगार मार्ग भी प्रदान करने चाहिए।

उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य आईटीआई को उद्योग की आवश्यकताओं के साथ अधिक निकटता से जोड़ना होना चाहिए ताकि प्रदान किए गए कौशल हमारे युवाओं के लिए सार्थक और उच्च वेतन वाली नौकरियों में परिवर्तित हो सकें। उन्होंने पाठ्यक्रमों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को तैयार करने में सरकार, उद्योग और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच घनिष्ठ सहयोग का आह्वान किया।

योजना पर विस्तृत प्रस्तुति देते हुए कौशल विकास विभाग के सचिव कुमार राजीव रंजन ने समिति को प्रस्तावित संस्थागत संरचना, वित्तपोषण पैटर्न, उन्नयन योजना और जम्मू-कश्मीर में कार्यान्वयन के लिए रोडमैप से अवगत कराया।

उन्होंने यह भी बताया कि पीएम-एसईटीयू योजना के तहत जम्मू-कश्मीर में पांच वर्षों में लगभग 482 करोड़ रुपये का अनुमानित निवेश किया जाएगा जिसमें से प्रत्येक हब-एंड-स्पोक क्लस्टर के लिए 241 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। प्रस्तावित मॉडल के तहत 10 सरकारी आईटीआई को आधुनिक उद्योग-उन्मुख कौशल संस्थानों में उन्नत किया जाएगा।

इसके अलावा इन संस्थानों को दो हब-एंड-स्पोक क्लस्टरों में संगठित किया जाएगा जिसमें प्रत्येक प्रशासनिक प्रभाग में एक हब आईटीआई होगा जो चार स्पोक आईटीआई के लिए एक केंद्रीय प्रौद्योगिकी और संसाधन केंद्र के रूप में कार्य करेगा।

उन्नत हब उन्नत प्रौद्योगिकियों, आधुनिक प्रशिक्षण अवसंरचना, इनक्यूबेशन सुविधाओं और प्रशिक्षकों के लिए क्षमता निर्माण सहायता प्रदान करेंगे और इस योजना का लक्ष्य 75 प्रतिशत संस्थागत प्लेसमेंट दर हासिल करना है।

पीएम-एसईटीयू की एक प्रमुख विशेषता इसका उद्योग-नेतृत्व वाला कार्यान्वयन ढांचा है जिसके तहत विशेष प्रयोजन वाहन संस्थागत प्रशासन, पाठ्यक्रम चयन, प्रौद्योगिकी अपनाने, प्रशिक्षण और प्लेसमेंट में उद्योग की अधिक सक्रिय भागीदारी को सुगम बनाएंगे। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि दी जाने वाली ट्रेनिंग मांग-आधारित हो न कि आपूर्ति-आधारित, और पाठ्यक्रम समय-समय पर बाजार के रुझानों और वास्तविक मानव संसाधन आवश्यकताओं के अनुरूप समायोजित किए जाएं।

प्रस्तावित परिवर्तन के अंतर्गत प्राथमिकता वाले प्रशिक्षण क्षेत्रों में उन्नत और स्मार्ट विनिर्माण; भारी इंजीनियरिंग और ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार, प्रक्रिया उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण और वस्त्र, परिधान, निर्माण और भवन आंतरिक सज्जा शामिल हैं साथ ही अन्य उभरते क्षेत्र भी हैं जिनमें यहां रोजगार की प्रबल संभावनाएं हैं।

समिति को सूचित किया गया कि पीएम-एसईटीयू की वित्तीय संरचना त्रिपक्षीय योगदान मॉडल पर आधारित है जिसमें केंद्र सरकार का 74.7 प्रतिशत, केंद्र शासित प्रदेश सरकार का 8.3 प्रतिशत और एंकर उद्योग भागीदारों का 17 प्रतिशत योगदान है। प्रत्येक हब आईटीआई के लिए औसत अनुमानित लागत लगभग 81 करोड़ और प्रत्येक स्पोक आईटीआई के लिए 40 करोड़ है।

भाग लेने वाली कंपनियों के लिए निर्धारित आधारभूत मापदंडों में पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान कम से कम 200 करोड़ का औसत वार्षिक कारोबार, सकारात्मक निवल मूल्य और 500 या अधिक कर्मचारियों का नियमित कार्यबल शामिल है।

अपने संबोधन के समापन में मुख्य सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि पीएम-एसईटीयू की सफलता का वास्तविक पैमाना उद्योग के लिए तैयार कुशल मानव संसाधन की एक स्थिर आपूर्ति तैयार करने और जम्मू-कश्मीर के युवाओं को बेहतर रोजगार और उद्यमिता के अवसरों से जोड़ने की क्षमता होगी जिससे कौशल विकास केंद्र शासित प्रदेश के आर्थिक विकास का एक मजबूत स्तंभ बन सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / राधा पंडिता