एनएसएसएफ और शी-लाइफ कार्यशाला का श्रीनगर में समापन

 


श्रीनगर, 24 सितंबर (हि.स.)।

राष्ट्रीय सहायक पर्यवेक्षण ढांचा और शी-लाइफ पहल पर कार्यशाला का आज श्रीनगर में समापन हुआ। वरिष्ठ अधिकारियों और प्रमुख हितधारकों ने दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने, महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भर सामुदायिक संस्थानों के निर्माण पर विचार-विमर्श किया।

भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के डीएवाई-एनआरएलएम द्वारा आयोजित इस क्षेत्रीय कार्यशाला की मेजबानी जम्मू कश्मीर सरकार के ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग के जम्मू कश्मीर ग्रामीण आजीविका मिशन ने की।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए ग्रामीण विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव अमित शुक्ला ने ग्रामीण महिलाओं को महिला किसानों से आत्मविश्वास से भरी महिला उद्यमियों में परिवर्तित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने 1.6 लाख सुनियोजित और बाज़ार के लिए तैयार महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों की स्थापना में डिजिटल प्ले टफॉर्म, शी- ला इफ बेहतर बाज़ार पहुंच और पशुपालन, मत्स्य पालन और मनरेगा जैसी विभागों और योजनाओं के समन्वय की भूमिका पर प्रकाश डाला।

गुणवत्ता पर बल देते हुए संयुक्त सचिव ने सामुदायिक संस्थानों को मजबूत करने और स्वयं सहायता समूह के उन सदस्यों को लक्षित समर्थन देने का आह्वान किया जो अभी अपने उद्यमशीलता के प्रारंभिक चरण में हैं। उन्होंने कहा कि क्लस्टर स्तरीय संघों को शासन, ऋण सुविधा और आजीविका सहायता के केंद्र में रहना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म, महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों के वास्तविक प्रदर्शन की संपूर्ण निगरानी और ट्रैकिंग को सक्षम बनाकर इस परिवर्तन में सहयोग करेंगे।

ग्रामीण विकास मंत्रालय में ग्रामीण आजीविका उप सचिव डॉ. मोनिका बी. ने जमीनी स्तर पर सशक्तिकरण के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि मजबूत महिला-नेतृत्व वाले संस्थान सतत ग्रामीण समृद्धि की नींव हैं।

उन्होंने कहा कि निरंतर क्षमता निर्माण, प्रभावी शासन और प्रत्यक्ष बाजार एकीकरण से स्वयं सहायता समूहों को स्वायत्त और स्वशासी संस्थाओं में परिवर्तित करने की प्रक्रिया में तेजी आएगी। प्रतिनिधियों ने व्यावहारिक कार्यान्वयन रणनीतियों, प्रौद्योगिकी-आधारित आजीविका समाधानों और ग्रामीण महिला उद्यमियों के लिए आर्थिक अवसरों के विस्तार पर व्यापक विचार-विमर्श में भाग लिया। चर्चा का मुख्य केंद्र सामुदायिक संस्थाओं की दीर्घकालिक स्थिरता, स्वशासन और प्रत्यक्ष बाजार एकीकरण सुनिश्चित करना था।

कार्यशाला का एक प्रमुख आकर्षण राष्ट्रीय सहायक पर्यवेक्षण ढांचा का परिचय था जो व्यावहारिक प्रबंधन उपकरणों, मानक शासन मानदंडों और स्पष्ट रूप से परिभाषित कार्यान्वयन समय-सीमाओं से सुसज्जित एक सहयोगात्मक कोचिंग और पर्यवेक्षण मॉडल है।

कार्यशाला में क्लस्टर स्तरीय संघों को स्वायत्त स्वावलंबी सीएलएफ में परिवर्तित करने के लिए एक रणनीतिक रोडमैप का भी अनावरण किया गया जिसका लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 5,000 मॉडल सीएलएफ विकसित करना है।

इस अवसर पर बोलते हुए जेकेआरएलएम की मिशन निदेशक डॉ. शुभ्रा शर्मा ने महत्वपूर्ण क्षेत्रीय कार्यशाला की मेजबानी का जिम्मा जेकेआरएलएम को सौंपे जाने पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों को एक साथ लाने के महत्व पर जोर दिया ताकि वे अनुभवों का आदान-प्रदान कर सकें और समन्वित हस्तक्षेपों और नवोन्मेषी दृष्टिकोणों के माध्यम से ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए प्रभावी रणनीतियाँ तैयार कर सकें।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता