जम्मू-कश्मीर में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए रेलवे और उद्योग विभाग की बड़ी पहल, माल ढुलाई सस्ती और आसान बनाने पर जोर
जम्मू,, 31 अक्टूबर (हि.स.)।
जम्मू-कश्मीर में उद्योगों को बढ़ावा देने और व्यापारियों के लिए माल ढुलाई को सस्ता, तेज और सुविधाजनक बनाने की दिशा में उत्तर रेलवे और उद्योग एवं वाणिज्य विभाग जम्मू ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसी सिलसिले में शनिवार को दोनों विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और उद्योगपतियों के बीच एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के लक्ष्यों को पूरा करने, रेलवे के जरिए माल ढुलाई बढ़ाने और जम्मू-कश्मीर में बेहतर परिवहन सुविधाएं विकसित करने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में उत्तर रेलवे के जम्मू मंडल की ओर से सीनियर डिविजनल कमर्शियल मैनेजर उचित सिंघल और उद्योग एवं वाणिज्य विभाग जम्मू की ओर से डायरेक्टर डॉ. अरुण मन्हास ने हिस्सा लिया। इस दौरान जम्मू, सांबा, कठुआ और उधमपुर के जिला उद्योग केंद्रों के जनरल मैनेजर भी मौजूद रहे। वहीं बड़ी ब्राह्मणा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष तरुण सिंगला सहित कई उद्योगपतियों, व्यापारियों और माल ढुलाई से जुड़ी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में भाग लिया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के उद्योगों, व्यापारियों और भारतीय रेलवे के बीच बेहतर तालमेल बनाना था ताकि फैक्ट्रियों में तैयार होने वाले सामान और कच्चे माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में कम समय और कम खर्च लगे। अधिकारियों ने मौजूदा माल ढुलाई व्यवस्था की समीक्षा की और भविष्य में रेलवे के जरिए अधिक सामान भेजने की संभावनाओं पर चर्चा की।
इस मौके पर रेलवे अधिकारियों ने माल ढुलाई से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं और नीतियों की जानकारी दी। सीनियर डिविजनल कमर्शियल मैनेजर उचित सिंघल ने बताया कि जेपीपी-आरसीएस ट्रेनों के जरिए पार्सल कोच की दोनों दिशाओं में एडवांस बुकिंग करने वाले व्यापारियों, माल ढुलाई एजेंसियों और लॉजिस्टिक्स सेवा देने वालों को किराए में विशेष छूट मिल सकती है।
उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था के तहत आने-जाने की कुल माल ढुलाई के लिए सामान्य एकतरफा किराए का केवल डेढ़ गुना भुगतान करना होगा। यानी एक दिशा में पूरा किराया और वापसी की दिशा में 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी। इससे व्यापारियों और माल ढुलाई से जुड़ी कंपनियों का खर्च कम करने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा बैठक में भारतीय रेलवे की ट्रांसशिपमेंट पॉलिसी के बारे में भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि रेलवे के जरिए माल परिवहन को अधिक सुविधाजनक और व्यापारियों के लिए फायदेमंद बनाने के उद्देश्य से विभिन्न योजनाओं पर काम किया जा रहा है।
बैठक में रेलवे की रोल-ऑन रोल-ऑफ सेवा पर भी विशेष चर्चा हुई। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, अगस्त 2026 में देशभर में लागू की गई इस नीति के तहत सामान से भरे ट्रकों को सीधे रेलवे के विशेष वैगनों पर चढ़ाकर लंबी दूरी तक पहुंचाया जा सकता है। इसके बाद निर्धारित स्टेशन पर ट्रकों को उतारकर सामान को उसके अंतिम स्थान तक पहुंचाया जाता है।
इस व्यवस्था का फायदा यह है कि माल से भरे ट्रकों को पूरी लंबी दूरी सड़क मार्ग से तय करने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे सड़क परिवहन पर दबाव कम करने, समय बचाने और माल ढुलाई के खर्च को घटाने में मदद मिल सकती है। अधिकारियों ने बताया कि नई नीति के तहत माल ढुलाई का किराया दूरी और प्रति टन-किलोमीटर के आधार पर तय करने की व्यवस्था रखी गई है ताकि किराया प्रणाली को अधिक प्रतिस्पर्धी और पारदर्शी बनाया जा सके।
बैठक में भविष्य के कार्गो टर्मिनल, उद्योगों को रेलवे से सीधे जोड़ने वाली रेल लाइनों और माल की डिजिटल ट्रैकिंग व्यवस्था पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने कहा कि इन सुविधाओं को प्रधानमंत्री गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि जम्मू-कश्मीर के औद्योगिक क्षेत्रों तक माल पहुंचाने की व्यवस्था बेहतर हो सके।
इस दौरान उद्योगपतियों और व्यापारियों ने माल ढुलाई के दौरान आने वाली समस्याओं को भी अधिकारियों के सामने रखा। दोनों विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने इन समस्याओं पर चर्चा की और भविष्य में बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
बैठक में इस बात पर सहमति जताई गई कि रेलवे, उद्योग विभाग और व्यापारिक संगठनों के बीच बेहतर तालमेल से जम्मू-कश्मीर के उद्योगों को फायदा पहुंचाया जा सकता है। साथ ही माल ढुलाई की लागत कम होने से स्थानीय कारोबार को बढ़ावा देने और क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अश्वनी गुप्ता