शुक्रवार के उपदेशों (खुत्बे) में एकरूपता का कोई आदेश नहीं: वक्फ प्रमुख दरख्शां अंद्राबी
श्रीनगर, 13 अक्टूबर (हि.स.)।
जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की चेयरपर्सन डॉ. सैयद दरख्शां अंद्राबी ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि बोर्ड ने अपनी संबद्ध मस्जिदों में शुक्रवार के उपदेशों (खुत्बे) में एकरूपता अनिवार्य करने का कोई आदेश जारी नहीं किया है। उन्होंने कहा कि धार्मिक विद्वान और उपदेशक उन मुद्दों को तय करने के लिए स्वतंत्र हैं जिन पर वे बात करना चाहते हैं।
श्रीनगर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए दरख्शां अंद्राबी ने कहा कि न तो वह और न ही वक्फ बोर्ड का कोई अधिकारी शुक्रवार के उपदेशों के विषयों को तय कर सकता है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह निर्णय स्वतंत्र धार्मिक विद्वानों, उपदेशकों और उपदेश देने वालों का होता है।
उन्होंने कहा कि न तो दरख्शां अंद्राबी कोई निर्णय ले सकती हैं और न ही मेरा कोई अधिकारी निर्णय ले सकता है। यह स्वतंत्र विद्वानों, हमारे उपदेशकों और उपदेश देने वालों का निर्णय है कि हमें समाज की बुराइयों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों, विशेष रूप से युवा पीढ़ी को प्रभावित करने वाले मुद्दों—जैसे ड्रग्स का सेवन, पारिवारिक चिंताएं, आत्महत्या और मानसिक आघात की ओर ध्यान आकर्षित करना था।
अंद्राबी ने कहा कि अगर हम आज ड्रग्स के बारे में बात करना चाहते हैं तो हम ड्रग्स के बारे में बात करेंगे। अगर हम बेटियों के बारे में बात करना चाहते हैं, अगर शादी नहीं हो रही है, तो हम उस पर बात करेंगे। अगर बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं तो वे ऐसा क्यों कर रहे हैं, हमारे समाज में आघात क्यों है, यह सब उन्होंने तय किया है। इस बात पर ज़ोर देते हुए कि बोर्ड ने अनिवार्य सामान्य उपदेशों के लिए कोई निर्देश जारी नहीं किया है।
उन्होंने कहा कि कोई आदेश नहीं है। कहीं भी कोई आदेश नहीं है। अंद्राबी ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित कोर कमेटी में धार्मिक विद्वान शामिल होंगे और वह इसकी सदस्य नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि कोर कमेटी कौन बनाएगा? धार्मिक नेता। उन्होंने आगे कहा कि वह कोई धार्मिक शिक्षिका नहीं हैं और विद्वान स्वतंत्र रूप से अपने उपदेशों के विषयों और तरीके का निर्णय लेंगे। उन्होंने कहा कि हमारे धार्मिक विद्वान जो भी करना चाहेंगे वे उसे अपने तरीके से करेंगे। इसमें कोई दखलअंदाज़ी नहीं होगी।
वक्फ़ प्रमुख ने कहा कि बोर्ड से जुड़े धार्मिक विद्वान सामाजिक बुराइयों को दूर करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने इसकी तुलना अपने-अपने क्षेत्रों में काम करने वाले डॉक्टरों, इंजीनियरों और शिक्षकों जैसे पेशेवरों से की। उन्होंने कहा कि बोर्ड का मकसद सामाजिक समस्याओं को हल करना है। उन्होंने राजनीतिक नेताओं से अपील की कि वे सामाजिक बुराइयों से निपटने की कोशिशों का विरोध करने के बजाय उन मुद्दों पर ध्यान दें जो ज़मीनी स्तर पर लोगों को प्रभावित करते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह