एनसी के नेतृत्व वाली सरकार पंजाबी, गोजरी और पहाड़ी को आधिकारिक भाषा बनाने के लिए बिल लाएगी: एनसी सांसद

 

श्रीनगर, 15 अक्टूबर (हि.स.)।

नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के नेतृत्व वाली सरकार ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा के 2027 के बजट सत्र में एक बिल पेश करने का फैसला किया है जिसके तहत पंजाबी, गोजरी और पहाड़ी भाषाओं को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया जाएगा।

एनसी के राज्यसभा सांसद शम्मी ओबेरॉय ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से लोगों से यह वादा किया है कि पंजाबी को आधिकारिक भाषाओं की सूची में शामिल किया जाएगा। ओबेरॉय ने बताया कि हमने पंजाबी, गोजरी और पहाड़ी भाषाओं को आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाने का फैसला किया है।

बता दें कि बुधवार को ओबेरॉय ने सिख संगत और विभिन्न गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी और उन्हें भरोसा दिलाया कि केंद्र शासित प्रदेश के 'आधिकारिक भाषा अधिनियम' के तहत पंजाबी भाषा को शामिल किया जाएगा।

2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद संसद ने 'जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषा अधिनियम, 2020' पारित किया था। इसके तहत कश्मीरी, डोगरी, उर्दू, हिंदी और अंग्रेज़ी को केंद्र शासित प्रदेश की आधिकारिक भाषा घोषित किया गया था।

इस अधिनियम में यह भी प्रावधान है कि केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक, 'कला, संस्कृति और भाषा अकादमी' जैसी संस्थागत प्रणालियों के माध्यम से गोजरी, पंजाबी और पहाड़ी भाषाओं को बढ़ावा देने और विकसित करने के लिए विशेष प्रयास करेंगे।

गौरतलब है कि 'जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019' केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा को यह अधिकार देता है कि वह किसी भी भाषा को केंद्र शासित प्रदेश की आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाने के लिए कानून बना सकती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह