नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तय किए गए संवैधानिक मुद्दों को दोबारा नहीं उठा सकते
जम्मू, 01 अक्टूबर (हि.स.)। भाजपा मानवाधिकार प्रकोष्ठ जम्मू-कश्मीर ने नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस द्वारा पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग वाले हालिया प्रस्ताव पर गंभीर चिंता व्यक्त की है विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति से संबंधित विधानसभा के पूर्व प्रस्तावों के संदर्भ में।
भाजपा मानवाधिकार प्रकोष्ठ जम्मू-कश्मीर के संयोजक राजेश थप्पा और सह-संयोजक सरफराज हामिद राथर ने एक संयुक्त बयान में कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस को भारत के संविधान और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के बाध्यकारी निर्णय का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने 11 दिसंबर 2023 को अनुच्छेद 370 से संबंधित मामले में अपने फैसले में अनुच्छेद 370 से संबंधित संवैधानिक स्थिति को बरकरार रखा था। सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय भारत के संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत बाध्यकारी है ।
राजेश थप्पा और सरफराज हामिद राथर ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के पास सर्वोच्च न्यायालय और संसद द्वारा तय किए गए संवैधानिक निर्णय को पलटने, रद्द करने या निरस्त करने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करना एक अलग मुद्दा है और इसे अगस्त 2019 से पहले मौजूद संवैधानिक व्यवस्था को पुनर्जीवित करने के किसी भी प्रयास से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
नेताओं ने कहा कि संविधान सर्वोच्च है और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले सभी अधिकारियों पर बाध्यकारी हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस द्वारा विधानसभा में पारित कोई भी प्रस्ताव संविधान को निरस्त नहीं कर सकता या देश के सर्वोच्च संवैधानिक न्यायालय के फैसले को रद्द नहीं कर सकता।
भाजपा मानवाधिकार प्रकोष्ठ ने सभी राजनीतिक दलों से संवैधानिक स्थिति का सम्मान करने और जम्मू-कश्मीर के विकास, सुशासन, लोकतांत्रिक संस्थाओं और जनता के कल्याण पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता