नासिर असलम वानी ने कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास की निगरानी के लिए गठित सर्वोच्च समिति को पुनर्जीवित करने का किया आह्वान

 

श्रीनगर, 13 जून (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सलाहकार नासिर असलम वानी ने शनिवार को कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास की निगरानी के लिए गठित सर्वोच्च समिति को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 2009 में तत्कालीन जम्मू और कश्मीर राज्य की सरकार जिसका नेतृत्व भी अब्दुल्ला कर रहे थे ने विस्थापित कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास की निगरानी और सुविधा प्रदान करने तथा केंद्र द्वारा घोषित पुनर्वास उपायों के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए सर्वोच्च समिति का गठन किया था। इस समिति में सरकारी प्रतिनिधि और कई कश्मीरी पंडित संगठनों के सदस्य शामिल थे।

विदेश में रहने वाले कश्मीरी पंडितों द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वानी ने कहा कि 2014 में भंग की गई समिति को पुनर्जीवित करने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन अच्छा है लेकिन इसके बाद हमें साथ बैठकर बातचीत करनी होगी। आपकी तरफ से कुछ प्रतिनिधि और हमारी तरफ से कुछ प्रतिनिधियों को आपस में बात करनी होगी और कश्मीरी पंडितों की वापसी का रास्ता खोजना होगा। उन्होंने कहा कि सरकारी स्तर पर मुझे लगता है कि सर्वोच्च समिति को बहाल करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों की सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी के लिए एक रोडमैप तैयार करने हेतु समिति को बहाल करने का समय आ गया है। वानी ने स्वीकार किया कि यह एक सच्चाई है कि लोगों का एक वर्ग ऐसा भी है जो शांति नहीं चाहता।

वानी ने कहा कि वे 1947 के फैसले (जम्मू और कश्मीर का भारत में विलय) के पक्ष में नहीं थे। लेकिन हमारे जैसे लोग भी थे। आप हर किसी पर एकतरफा आरोप नहीं लगा सकते। ऐसे लोग भी हैं जिनके दिल तब भी आपके लिए धड़कते थे और आज भी धड़कते हैं। पंडितों की वापसी के बिना संतों की यह घाटी अधूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पंडितों को वापस लाने के लिए अपने स्तर पर प्रयास किए हैं। चाहे वह पुनर्वास कार्य हो, प्रधानमंत्री का पैकेज हो, पारगमन शिविर हों, अस्थायी आवास हों या सर्वोच्च समिति हमने अपनी पूरी कोशिश की। आप हम सभी को एक ही तराजू पर नहीं तौल सकते। उन्होंने कहा कि हां कुछ लोगों से गलतियां हुईं लेकिन उन गलतियों को सुधारने के प्रयास भी किए गए। अगर आपको कांटा चुभा तो हमने भी वह दर्द महसूस किया।

वानी ने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप से परिणाम नहीं मिलेंगे। उन्होंने कहा कि हम चाहे जो भी प्रयास करें, चाहे संवाद हो या समितियाँ गठित करे लेकिन जब तक हमारे कश्मीरी पंडित भाई घाटी में वापस नहीं बस जाते तब तक सब कुछ अधूरा है। इसके लिए हमें मिलकर काम करना होगा। बहुत समय बीत चुका है और अगर हम आज भी एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहेंगे तो हम किसी समाधान तक नहीं पहुँच पाएंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता