माया में भटका मानव, वेदों में छिपा परम सत्य-स्वामी राम स्वरूप जी

 


कठुआ, 20 जून (हि.स.)। वेद मन्दिर योल में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 69वें दिन श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा। इस अवसर पर योगाचार्य स्वामी राम स्वरूप जी ने अथर्ववेद काण्ड 4 सूक्त 30 के मंत्रों का गूढ़ आध्यात्मिक ज्ञान श्रद्धालुओं को प्रदान किया।

अपने प्रवचन में उन्होंने बताया कि परमेश्वर ही इस सम्पूर्ण सृष्टि का एकमात्र स्वामी और आधार है। ईश्वर स्वयं वेदों के माध्यम से मनुष्यों को ज्ञान प्रदान करता है जिसे ऋषि-मुनि अपने आचरण में धारण करते हैं।

उन्होंने कहा कि परमात्मा उन्हीं साधकों को तेज, ज्ञान और उत्तम बुद्धि प्रदान करता है जो तप श्रद्धा और सच्चे आचरण से उसे प्रिय होते हैं। स्वामी जी ने यह भी समझाया कि मनुष्य परमेश्वर के दिए हुए प्राण, इन्द्रियों और अन्न से जीवन यापन करता है फिर भी अज्ञानवश उसे नहीं पहचान पाता। ऐसे लोग माया में उलझे रहते हैं जबकि केवल श्रद्धावान और वेदवाणी को सुनने वाला व्यक्ति ही सच्चे ज्ञान को प्राप्त करता है। उन्होंने आगे कहा कि परमेश्वर ही समस्त लोकों का रचयिता है उसकी महिमा इस ब्रह्माण्ड तक सीमित नहीं बल्कि उससे परे भी अनंत रूप में विद्यमान है। वेदों में वर्णित इसी सत्य स्वरूप परमेश्वर की उपासना ही वास्तविक मार्ग है। कार्यक्रम के अंत में स्वामी राम स्वरूप जी ने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे वेदों की ओर पुनः लौटें और वैदिक ज्ञान को अपनाकर अपने जीवन को सफल बनाएं।

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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया