उप-राज्यपाल सक्सेना ने लद्दाख में नंबरदारों के मानदेय में तीन गुना से ज़्यादा बढ़ोतरी को मंज़ूरी दी

 

लेह, 21 सितंबर(हि.स.)। लद्दाख में नंबारदारों (गाँव के मुखिया) की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने और ज़मीनी स्तर पर प्रशासन में उनकी अहम भूमिका को मान्यता देने वाले एक बड़े फ़ैसले में उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने नंबारदारों का मासिक मानदेय 1,500 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये करने की मंज़ूरी दी है। यह 233 प्रतिशत से ज़्यादा की बड़ी बढ़ोतरी है। यह बढ़ोतरी जो पिछले 10 सालों (यानी 2016 के बाद) में पहली बार हुई है केंद्र शासित प्रदेश के 247 नंबारदारों (जिन्हें स्थानीय भाषा में 'गोबा' कहा जाता है) को फ़ायदा पहुँचाएगी।

उप-राज्यपाल सक्सेना ने कहा कि इस कदम से नंबारदारों को आर्थिक मदद तो मिलेगी ही साथ ही लद्दाख में भागीदारी वाली शासन व्यवस्था भी मज़बूत होगी जो यहाँ के टिकाऊ और समावेशी विकास के लिए बहुत ज़रूरी है। यह फ़ैसला नंबारदारों (गोबा) की मानदेय बढ़ाने की लंबे समय से चली आ रही माँग को पूरा करता है।

लद्दाख के अलग-अलग गाँवों के दौरे के दौरान उप-राज्यपाल सक्सेना को नंबारदारों से मानदेय बढ़ाने के बारे में कई अनुरोध मिले थे। हाल ही में 19 सितंबर 2026 को अलग-अलग गाँवों के नंबारदारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उप-राज्यपाल से मुलाक़ात की थी और मानदेय बढ़ाने की माँग की थी। उन्होंने कहा था कि नंबारदारों की ज़िम्मेदारियों को देखते हुए मौजूदा राशि बहुत कम है। उनकी चिंताओं पर ध्यान देते हुए उप-राज्यपाल ने मुख्य सचिव को मामले की जाँच करने और समस्या का समाधान करने का निर्देश दिया था। गौरतलब है कि नंबारदार (गोबा) ज़मीनी स्तर पर अहम भूमिका निभाते हैं और सरकार व ग्रामीणों के बीच एक कड़ी का काम करते हैं। हाल के वर्षों में खासकर लद्दाख के दूर-दराज़ और भौगोलिक रूप से कठिन इलाकों में सार्वजनिक सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने और समुदाय-आधारित सरकारी पहलों पर बढ़ते फ़ोकस के कारण उनकी ज़िम्मेदारियाँ और भी महत्वपूर्ण हो गई हैं। ग्रामीणों के साथ उनके नियमित संपर्क से वे स्थानीय ज़रूरतों को प्रशासन तक पहुँचा पाते हैं और साथ ही लोगों को विभिन्न सरकारी पहलों को समझने और उनका लाभ उठाने में मदद करते हैं।

उप-राज्यपाल ने ज़ोर देकर कहा कि मानदेय में इस बढ़ोतरी का मकसद न केवल ज़्यादा आर्थिक मदद देना है बल्कि गाँव के स्तर पर प्रशासनिक पहुँच विकास कार्यों और सरकारी कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने में 'गोबा' द्वारा निभाई जाने वाली ज़िम्मेदारियों को मान्यता देना भी है।

हिन्दुस्थान समाचार / राधा पंडिता