उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री व फारूक अब्दुल्ला ने हजरत इमाम हुसैन को दी श्रद्धांजलि
श्रीनगर, 26 जून (हि.स.)। जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को मुहर्रम के इस्लामी महीने के दसवें दिन आशूरा के अवसर पर हजरत इमाम हुसैन को श्रद्धांजलि अर्पित की।
उपराज्यपाल ने एक्स पर लिखा, कर्बला में हजरत इमाम हुसैन (एएस) और उनके साथियों का सर्वोच्च बलिदान सत्य, न्याय और मानवीय गरिमा को कायम रखते हुए मानवता के लिए एक शाश्वत प्रेरणा बना हुआ है।
उन्होंने लोगों से इन सार्वभौमिक आदर्शों को आत्मसात करने और एक शांतिपूर्ण, प्रगतिशील और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने इमाम हुसैन और उनके अनुयायियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सत्य, न्याय और धर्म के लिए उनके अद्वितीय बलिदान की सराहना की। आशूरा के अवसर पर अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्बला की त्रासदी अत्याचार के विरुद्ध साहस, दृढ़ता और प्रतिरोध का एक शाश्वत प्रतीक बनी हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्बला का संदेश समय और भूगोल से परे है। यह मानवता को अन्याय के विरुद्ध दृढ़ रहने, नैतिक मूल्यों को कायम रखने और चुनौतियों के बावजूद सत्य और न्याय के सिद्धांतों की रक्षा करने के लिए प्रेरित करता है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने हजरत इमाम हुसैन और उनके वफादार साथियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि कर्बला का अद्वितीय बलिदान समस्त मानवता के लिए सत्य, न्याय, दृढ़ता और अटूट आस्था के मार्ग को प्रकाशित करता रहेगा।
फारूक अब्दुल्ला ने कहा, “हजरत इमाम आली मकाम (एएस) द्वारा अपने परिवार और समर्पित साथियों के साथ दिया गया सर्वोच्च बलिदान अत्याचार, उत्पीड़न, झूठ और अन्याय के विरुद्ध प्रतिरोध का शाश्वत प्रतीक है।” उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन किसी विशेष संप्रदाय या समुदाय से संबंधित नहीं हैं बल्कि उनकी विरासत संपूर्ण उम्माह और समस्त मानवता की सामूहिक धरोहर है। हज़रत इमाम हुसैन (एएस) का बलिदान एक शाश्वत सबक देता है कि सत्य और सिद्धांतों पर अडिग रहने वाले लोग लोगों के दिलों में अमर हो जाते हैं जबकि अत्याचारी, क्षणिक सांसारिक विजयों के बावजूद, इतिहास में अपमान और निंदा के पात्र होते हैं। कर्बला की त्रासदी हमें धैर्य, त्याग, निष्ठा और सर्वशक्तिमान अल्लाह की इच्छा के प्रति पूर्ण समर्पण के मूल्यों को सिखाती है। उन्होंने प्रार्थना की कि यौम-ए-आशूरा का पवित्र अवसर जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के लोगों के साथ-साथ पूरे देश के लिए शांति, समृद्धि, सांप्रदायिक सद्भाव और दिव्य आशीर्वाद का स्रोत बने। इमाम हुसैन और उनके साथियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने उनके बलिदान को सत्य, न्याय और अत्याचार के विरुद्ध दृढ़ प्रतिरोध का सर्वोच्च प्रतीक बताया।
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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह