सीयूजे में भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण पर व्याख्यान, समुद्री सुरक्षा की चुनौतियों पर हुई चर्चा
जम्मू, 01 अगस्त (हि.स.)। केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू (सीयूजे) के राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन विभाग (एनएसएस) ने 'ग्लोबल सिक्योरिटी डायनेमिक्स' व्याख्यान श्रृंखला के तहत भारतीय नौसेना का आधुनिकीकरण: प्रगति और संभावनाएं विषय पर एक विशेष व्याख्यान आयोजित किया। विश्वविद्यालय के ब्रिगेडियर राजिंदर सिंह सभागार में आयोजित कार्यक्रम में भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी कमांडर शिव माथुर ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने तीन दशक के अनुभव साझा किए। कार्यक्रम का आयोजन कुलपति प्रो. (डॉ.) संजीव जैन के संरक्षण में किया गया। इसका संयोजन एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आर. सुधाकर ने किया जबकि सह-संयोजक प्रो. एम. वेंकटरमण और विभागाध्यक्ष डॉ. नीता रानी सहित विभाग के शिक्षकों ने इसमें सहयोग दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत सहायक प्रोफेसर डॉ. तिलक राज शर्मा के स्वागत भाषण से हुई जबकि डॉ. अनुराधा चौधरी ने अतिथि वक्ता का परिचय देते हुए समुद्री सुरक्षा और नौसेना के आधुनिकीकरण के महत्व पर प्रकाश डाला। अपने व्याख्यान में कमांडर शिव माथुर ने भारत के समुद्री इतिहास, वैश्विक व्यापार मार्गों और सामरिक समुद्री मार्गों की चर्चा करते हुए अमेरिका, रूस और भारत की नौसैनिक आधुनिकीकरण रणनीतियों का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने भारत के स्वदेशी युद्धपोत निर्माण, रक्षा उत्पादन, विमानवाहक पोत, मिसाइल प्रणाली और पनडुब्बी क्षमता में हो रही प्रगति की जानकारी दी तथा रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण हालात का हवाला देते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे सामरिक समुद्री मार्गों के महत्व को रेखांकित किया।
उन्होंने भारतीय नौसेना के सामने मौजूद चुनौतियों का उल्लेख करते हुए अत्याधुनिक तकनीक से लैस स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान प्रो. एम. वेंकटरमण ने भी समुद्री और स्थलीय सुरक्षा की परस्पर निर्भरता पर अपने विचार रखे। व्याख्यान के बाद विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने नौसेना के आधुनिकीकरण तथा समकालीन सुरक्षा चुनौतियों से जुड़े विषयों पर कमांडर शिव माथुर से संवाद किया। अंत में सहायक प्रोफेसर डॉ. एकता मनहास ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा