जम्मू में ‘भारतीय बोध’ पुस्तक का लोकार्पण, आधुनिक शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने की पहल
जम्मू, 24 फ़रवरी (हि.स.)। जम्मू के सरकारी शिक्षा महाविद्यालय, जम्मू में मंगलवार को ‘भारतीय बोध: आधुनिक शिक्षा के लिए भारतीय ज्ञान प्रणाली को पुनर्जीवित करना’ पुस्तक का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम भारत की समृद्ध बौद्धिक विरासत और उसकी समकालीन शिक्षा में प्रासंगिकता को समर्पित रहा। पुस्तक का विमोचन कॉलेज की प्राचार्य डॉ. ज्योति परिहार द्वारा संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया। इस पुस्तक का संपादन प्रो. जे. एन. बलिया, डॉ. ज्योति परिहार, डॉ. शालिनी राणा और डॉ. राकेश भारती ने किया है। यह संकलन भारतीय ज्ञान प्रणाली को आधुनिक शैक्षिक विमर्श में पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अकादमिक प्रयास है।
अपने संबोधन में डॉ. ज्योति परिहार ने कहा कि आधुनिक शिक्षा को भारत की स्वदेशी ज्ञान परंपराओं से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ‘भारतीय बोध’ केवल एक पुस्तक नहीं बल्कि भारतीय चिंतन में निहित मूल्यों, नैतिकता और समग्र दृष्टिकोण को समकालीन शिक्षण पद्धति से जोड़ने का सशक्त प्रयास है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना को साकार करने में ऐसे प्रकाशनों की महत्ता पर भी बल दिया।
आईक्यूएसी संयोजक डॉ. शालिनी राणा ने उच्च शिक्षा में गुणवत्ता संवर्धन और नवाचार की आवश्यकता को रेखांकित किया। समारोह में प्रो. सतीश शर्मा, प्रो. सुनंदा रानी, डॉ. राजिंदर कौर, डॉ. दविंदर कौर, प्रो. बलवान सिंह, डॉ. सूरज प्रकाश, डॉ. सोनम गंडोत्रा, प्रो. रामनदीप करालिया सहित अनेक शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का समापन प्रो. बलवान सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। ‘भारतीय बोध’ का यह विमोचन कॉलेज की शैक्षणिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जो परंपरा और आधुनिकता के समन्वय की दिशा में एक सार्थक कदम है।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा