कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों की जमीन उनको वापस मिली: मुख्यमंत्री उमर

 


जम्मू, 28 मार्च (हि.स.)।जम्मू और कश्मीर सरकार ने शनिवार को कहा कि उसने घाटी में कश्मीरी पंडितों की अतिक्रमित जमीन वापस ले ली है और उन्हें उनकी जमीन वापस दे दी है।

विधानसभा में भाजपा विधायक युद्धवीर सेठी के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि कश्मीर घाटी में कश्मीरी प्रवासियों की 3,729 कनाल और 4 मरला जमीन वापस ले ली गई है और उन्हें उनकी जमीन वापस दे दी गई है। अब्दुल्ला ने कहा कि नवंबर 2024 से अब तक कश्मीरी पंडितों की 844 कनाल और 4 मरला जमीन वापस ले ली गई है और उन्हें उनकी जमीन वापस दे दी गई है।

आंकड़ों से पता चलता है कि 1990 में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के उदय के बाद लक्षित हत्याओं के कारण पलायन करने वाले कश्मीरी पंडितों की करोड़ों रुपये की जमीन पर अवैध कब्जा था। आपदा प्रबंधन, राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण विभाग के प्रभारी अब्दुल्ला ने बताया कि संपत्ति पुनर्प्राप्ति प्रक्रिया जम्मू और कश्मीर प्रवासी अचल संपत्ति (संरक्षण, सुरक्षा और संकट बिक्री पर रोक) अधिनियम के प्रावधानों के तहत चलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रवासी संपत्तियों के संरक्षक के रूप में कार्य कर रहे उपायुक्तों के नेतृत्व में जिला प्रशासनों ने जमीन मालिकों को वापस दिलाने के प्रयास किए हैं।

जिलावार विवरण साझा करते हुए अब्दुल्ला ने बताया कि शोपियां (283 कनाल), बारामूला (225 कनाल) और गांदरबल (146 कनाल) सहित अन्य जिलों में जमीन वापस कर दी गई है जबकि अनंतनाग, बांदीपोरा, बडगाम, कुलगाम, कुपवाड़ा, पुलवामा और श्रीनगर जिलों में छोटे हिस्से वापस किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि त्वरित मामले निपटान के लिए अतिरिक्त उपायुक्तों को नोडल अधिकारी नामित किया गया है जबकि जनवरी में गठित एक संचालन समिति कार्यान्वयन की निगरानी कर रही है और पुनर्प्राप्ति प्रक्रिया को सुव्यवस्थित कर रही है। अब्दुल्ला ने यह भी बताया कि ऑनलाइन शिकायत निवारण पोर्टल चालू है जिस पर 10,173 आवेदन प्राप्त हुए हैं जिनमें से 9,713 का निपटारा हो चुका है और 7,829 स्वीकृत किए गए हैं जबकि केवल 24 मामले लंबित हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने उपायुक्तों को अतिक्रमण मामलों में एफआईआर दर्ज करने, भौगोलिक रूप से चिह्नित सूची बनाने, संपत्ति हस्तांतरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, राजस्व अभिलेखों को नियमित रूप से अद्यतन करने और संकटकालीन बिक्री की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने मौके पर ही शिकायत निवारण के लिए 1 अप्रैल से 28 अप्रैल तक जम्मू में शिविर आयोजित करने की भी योजना बनाई है।

कल्याणकारी उपायों पर प्रकाश डालते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि प्रति व्यक्ति प्रति माह 3,250 रुपये की वित्तीय सहायता, प्रति परिवार 13,000 रुपये की सीमा के भीतर, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से मुफ्त राशन लाभ के साथ प्रदान की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि 5,248 दो कमरों वाले मकानों का निर्माण किया जा चुका है, जबकि 6,000 अस्थायी आवास इकाइयों में से 4,112 पूरी हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि 6,000 सरकारी नौकरियों को मंजूरी दी गई है जिनमें से 5,896 नियुक्तियां की जा चुकी हैं जबकि प्रवासी परिवारों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, छात्रवृत्तियों और अन्य सहायता उपायों का विस्तार दिया जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह